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भारतीय कश्मीर में फिर घुसी चीनी सेना

चीन की सेना भारत प्रशासित कश्मीर के विवादापस्द हिस्से में फिर घुसी. ऐसी रिपोर्टें हैं कि चीनी सैनिक सितंबर और अक्टूबर के महीने में लद्दाख में घुसे और उन्होंने वहां चल रहे विकास कार्य को धमकी देकर रुकवाया.

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ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर और अक्टूबर में चीन के सैनिक लद्दाख के उत्तर पूर्वी इलाके में घुसे. आरोप है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों ने भारत प्रशासित इलाके में विकास कार्यों को भी रुकवाया. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चीनी सेना का मोटरसाइकिल दस्ता जम्मू कश्मीर के गोमबिर इलाके में घुसा. सितंबर अक्टूबर के दौरान वहां केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यक्रम के तहत शेड बनाए जा रहे थे. चीनी सैनिकों ने इस काम को बंद करने की धमकी दी. एक सूत्र के हवाले से पीटीआई ने रिपोर्ट दी है कि जैसे ही चीनी सैनिक गोमबिर में घुसे, भारतीय मजदूरों में हड़कंप मच गया. मजदूर आनन फानन में भारतीय सेना के पास पहुंचे और मामले की जानकारी दी.

इसके बाद सेना ने जम्मू कश्मीर सरकार से संपर्क किया. सेना ने रक्षा मंत्रालय गोमबिर में तीन इनफैक्ट्री डिविजनों को तैनात करने की अनुमति मांगी. भारतीय सेना का यह भी कहना है कि नियंत्रण रेखा के पास कोई काम करने से पहले राज्य सरकार को रक्षा मंत्रालय से अनुमति मांगनी चाहिए. गोमबिर में भारत और चीन के बीच 50 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा है. यह जगह जिला मुख्यालय लेह से 300 किलोमीटर दूर है.

Nomad – India, Ladakh

लद्दाख का नोमद क्षेत्र

न्योमा के पूर्व एसडीएम तेसरिंग नोरबू को राज्य सरकार ने चीनी घुसपैठ की जांच करने के लिए नियुक्त किया है. वह कहते हैं, ''वह कई दशकों से इस इलाके में पशुओं को चराने वाले न्योमा के लोगों को भी डरा रहे हैं. वह हमारी जमीन एक एक इंच कर हड़पने की कोशिश कर रहे है. चीन में तो कहावत ही है कि एक एक इंच करके आगे बढ़ना एक गज आगे बढ़ने से अच्छा है.'' लेकिन इस रिपोर्ट पर लद्दाख डिवीजन में तैनात भारतीय सेना के अफसरों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

राज्य सरकार लेह लद्दाख के इलाके में कई सड़कें बना रही है. इनमें नियंत्रण रेखा से सटे न्योमा और देमचौक इलाके की सड़कें भी शामिल है. सरकार का तर्क है कि सड़कों से वहां के लोगों को आने जाने और रोजगार पाने में मदद मिलेगी. लेकिन यह बातें चीन को अखर रही हैं. रिपोर्टों के मुताबिक नवंबर 2009 में चीनी सेना ने भारतीय लद्दाख में घुसपैठ की थी और सड़क निर्माण में बाधा डाली. चीनी सेना ने सड़क निर्माण पर आपत्ति जताई और फिर भारतीय रक्षा मंत्रालय ने देमचौक इलाके में सड़क निर्माण का काम बंद करा दिया.

जुलाई 2009 में भी चीनी सैनिकों ने भारत में घुसपैठ की. तब वह नियंत्रण रेखा के बजाए सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा के भीतर डेढ़ किलोमीटर तक घुस आए. 31 जुलाई 2009 को माउंट ग्या के पास की चट्टानों में लाल रंग से 'चाइना' से नारे लिखे मिले. माउंट ग्या को ब्रिटिश हूकूमत के वक्त से ही चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: ए जमाल

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