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दुनिया

भारतीय कर्मचारियों की कटौती पर सोचेंगे कैमरन

ब्रिटिश कंपनियों के विरोध के बात प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने संकेत दिया कि भारत और यूरोप के बाहर से आने वाले कर्मचारियों की संख्या में बहुत ज्यादा कटौती नहीं की जाएगी. इससे कंपनियां दुनिया भर के बेस्ट टेलेंट बुला सकें.

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ब्रिटेन के औद्योगिक संघ सीबीआई में भाषण के दौरान कैमरन ने सरकार की नीतियों की रुपरेखा प्रस्तुत की. जिसमें उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के आर्थिक विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी. कैमरन ने विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार नई कंपनियों की वृद्धि सुनिश्चित करेगी.

कई ब्रिटिश कंपनियों की चिंता के मद्देनजर कैमरन ने कहा, "मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हम अपनी सीमाओं पर नियंत्रण कर रहे हैं और आप्रवासियों की संख्या को कम करने की कोशिश कर रहे हैं इसका मतलब ये नहीं है कि हम आपको दुनिया के सबसे निपुण कर्मचारियों को यहां लाने से रोकेंगे."

यूरोपीय संघ के बाहर से आने वाले आप्रवासियों पर लगाम लगाना ब्रिटिश सरकार का मुख्य एजेंडा है. सरकार अप्रैल 2011 तक यूरोपीय संघ के बाहर से आने वाले लोगों की संख्या 24,100 सीमित करना चाहती है.

कैमरन ने ब्रिटिश कंपनियों के अपील की वह भारत के साथ ज्यादा व्यापार करें. उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि आयरलैंड को भारत, ब्राजील, चीन, रूस, से भी ज्यादा माल निर्यात किया जाता है.

Indien Manmohan Singh David Cameron

कैमरन ने कहा, "पिछले साल भारत और चीन को निर्यात सिर्फ 3.2 फीसदी था. ये चौंकाने वाला है. इसलिए इस साल गर्मियों में जब मैं भारत गया तो ब्रिटेन से व्यापारियों और व्यावसाइयों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल अपने साथ ले गया."

प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा कि कैमरन के भाषण का मतलब आप्रवास नीति पर फिर से विचार करना नहीं है बल्कि एक सीमा तय कर देना है. "ये पुनर्विचार नहीं है, क्योंकि फिलहाल हम अगले वसंत तक अस्थाई सीमा तय कर रहे हैं. इस पर भी विचार जारी है कि आगे कितनी कटौती की जाए. लेकिन यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि बिजनेस के लिए कंपनियां उन लोगों को ला सकें जिनकी उन्हें जरूरत है."

सरकार की इस नीति के कारण जीई जैसी बड़ी कंपनियों ने ब्रिटेन में विस्तार की योजना खत्म कर दी है क्योंकि वे कुशल कामगारों को यूरोपीय संघ के बाहर से यहां नहीं ला सकते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः एमजी

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