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खेल

भारतीय ओलंपिक संघ पर बिफरे बिंद्रा

ओलंपिक में स्वर्ण जीतने वाले भारत के निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने कहा है कि ओलंपिक संघ पर प्रतिबंध अप्रत्यक्ष रूप से शायद अच्छा ही होगा.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी आईओसी की कार्यकारिणी की बैठक लूसान में चार और पांच दिसंबर को होनी है जिसमें तय किया जाएगा कि चुनाव के दौरान ओलंपिक चार्टर के उल्लंघन के मामले में भारत के ओलंपिक संघ को निलंबित किया जाए या नहीं.

भारतीय ओलंपिक संघ को दिल्ली की अदालत ने निर्देश दिया है कि सरकार के खेल नियमों के अनुसार वह संघ के चुनाव करवाए जबकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी चाहती है कि चुनाव ओलंपिक चार्टर के मुताबिक हों. चार्टर स्वायत्तता की पैरवी करता है.

चुनाव पांच दिसंबर को होने हैं लेकिन प्रतिद्वंद्वी सदस्य रणधीर सिंह के नामांकन वापिस लेने के कारण यह अब सिर्फ औपचारिकता है. नामांकन वापिस होने से ललित भनोट आईओए के महासचिव बने रहेंगे जबकि अभय सिंह चौटाला इसके अध्यक्ष बन जाएंगे.

कॉमनवेल्थ घोटाले में 11 महीने जेल के बाद भनोट फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. भनोट और चौटाला दोनों ही आईओए के पूर्व प्रमुख सुरेश कलमाड़ी के नजदीकी माने जाते हैं.

भारत के लिए स्वर्ण जीतने वाले बिंद्रा का कहना था कि भनोट के आईओए में आने से वह चकित हैं. "वह कैसे आ सकते हैं. ऐसे लोगों को फिर लौटते देखना दुखद है. इससे मेरा खून खौलता है."

बिंद्रा के मुताबिक संभावित रोक से शायद भारत को अपना खेल प्रशासन सुधारने का एक मौका मिलेगा. "अगर हमारे ओलंपिक संघ पर रोक लग जाती है. तो यह अप्रत्यक्ष वरदान जैसा हो हो सकता है. 2013 में कई खेलों वाला कोई आयोजन नहीं है तो भारतीय खिलाड़ी तीन से छह महीने का विलम्ब झेल सकते हैं और वर्तमाम सिस्टम में बदलाव के लिए इकट्ठा हो सकते हैं."

आईओसी की सदस्यता से निलंबन का मतलब है कि भारत को कमेटी से पैसे नहीं मिलेंगे और अधिकारी ओलंपिक बैठकों और आयोजनों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. साथ ही भारत के खिलाड़ी भी ओलंपिक कमेटी के आयोजनों में देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेंगे. हालांकि ओलंपिक ध्वज के नीचे कुछ खिलाड़ी आयोजनों में शामिल हो सकते हैं.

एएम/एमजी (एएफपी)

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