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दुनिया

भारतीय अर्थव्यवस्था 8.8 फीसदी की दर से बढ़ी

भारतीय अर्थव्यवस्था ने दो साल में सबसे बड़ा उछाल दर्ज करते हुए 8.8 फीसदी की विकास दर हासिल कर ली है. जून में खत्म हुई तिमाही के आंकड़ों से यह बात साफ होती है. उत्पादन में तेजी हुई, जबकि वित्तीय क्षेत्र में उत्साह नहीं.

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भारतीय पीएम मनमोहन सिंह

पिछले साल इस तिमाही में भारत की विकास दर छह फीसदी ही थी. इस साल खेतीबाड़ी के क्षेत्र में 2.8 प्रतिशत की विकास दर पाई जा सकी, जो पिछले साल की 1.9 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है. लेकिन सबसे ज्यादा बढ़त उत्पादन क्षेत्र में देखी गई. पिछले साल इसकी विकास दर महज 3.8 प्रतिशत थी, जो 2010 में उछल कर 12.4 प्रतिशत हो गई. निर्माण के क्षेत्र में भी विकास पिछले साल के 4.6 फीसदी से बढ़ कर 7.5 प्रतिशत हो गई है.

लेकिन सेवा क्षेत्र, बीमा और रियल एस्टेट की विकास दर सिर्फ आठ फीसदी के आस पास रही, जो पिछले साल 11.8 प्रतिशत थी. इस लिहाज से भारतीय अर्थव्यवस्था को थोड़ा मायूस होना पड़ा है. इसी तरह निजी सेवा क्षेत्र में भी कमी आंकी गई है. लेकिन व्यापार, होटल और संचार क्षेत्रों में 12.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले साल सिर्फ 5.5 प्रतिशत ही थी.

सरकार का अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. हालांकि आर्थिक मामलों के कई जानकारों का कहना है कि संभव है कि भारत इस साल नौ फीसदी का विकास दर हासिल कर ले.

दो साल पहले की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी में जहां दुनिया भर के देशों का विकास निगेटिव हो गया, भारत और चीन की अर्थव्यवस्था ने घटे दर से ही सही, ऊपर का रुख जारी रखा. लेकिन अब मंदी की मार खत्म होती दिख रही है और दुनिया भर के देशों की इकॉनॉमी फिर से पटरी पर आ रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः वी कुमार

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