भारतीय अर्थव्यवस्था की नई छलांग | ताना बाना | DW | 30.11.2010
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ताना बाना

भारतीय अर्थव्यवस्था की नई छलांग

वैश्विक वित्तीय संकट से उबरने में भारत ने तेजी दिखाई है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सितंबर को समाप्त हुई तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.9 फीसदी रही और उसने विकास की भविष्यवाणियों को पीछे छोड़ दिया.

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वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.2 फीसदी के विकास दर की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन मैनुफैक्चरिंग में 9.8 फीसदी की तेजी और निर्माण क्षेत्र में 8.8 फीसदी की वृद्धि ने विकास दर को लगभग 9 फीसदी तक पहुंचा दिया.

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को अच्छी फसल का भी लाभ मिला है. केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के आंकड़ों के अनुसार अच्छे मॉनसून के कारण कृषि क्षेत्र में विकास दर 4.4 फीसदी रही.

मजबूत सम्यक विकास के आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब भारत ने वैश्विक मंदी से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए लाए गए आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज में कटौती करनी शुरू कर दी है. दुनिया भर के निवेशक फिर से भारत के सुदृढ़ विकास का लाभ उठाने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर झोंक रहे हैं, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाएं अभी भी मंदी की मार से उबरने के लिए संघर्ष कर रही हैं.

क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी चीन के बाद भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. दूसरी तिमाही में चीन की विकास दर 9.6 फीसदी रही है. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार आने वाले वर्षों में दुहरे अंक वाला विकास चाहती है.

विश्व बैंक के अनुसार भारत में अभी भी 40 फीसदी से ज्यादा लोग सवा डॉलर प्रति दिन की आय के साथ गरीबी रेखा से नीचे अत्यंत गरीबी में रहते हैं, जबकि पड़ोसी चीन में अत्यंत गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 16 प्रतिशत है.

वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत का विकास दर 8.9 फीसदी रहा. वित्त सचिव अशोक चावला ने कहा है कि 1.3 खरब डॉलर वाली अर्थव्यवस्था में सुधार व्यापक है और सभी क्षेत्रों में स्थिति सुधर रही है. वित्तीय संकट शुरू होने से पहले 2006 से 2008 तक भारत की विकास दर औसत 9.5 फीसदी थी.

रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा

संपादन: वी कुमार

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