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दुनिया

भारतीयों के लिए वीजा नियम नहीं बदलेगा ब्रिटेन

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने अपनी पहली भारत यात्रा को सफल बताते हुए व्यापार संबंधों को और आगे बढ़ाने का भरोसा जताया है. लेकिन उन्होंने भारतीयों के लिए वीजा की सबसे बड़ी मांग को मानने से इनकार कर दिया.

ब्रेक्जिट के निर्णय के बाद जुलाई में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनीं टेरीजा मे को यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद के ब्रिटेन और भारत के बीच साथ काम करने के "असीम अवसर" दिखाई देते हैं. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार प्रमुख का पद संभालने के बाद यूरोप के बाहर यह उनकी पहली विदेश यात्रा थी.

दो दिन के दौरे पर भारत पहुंची टेरीजा मे की यात्रा पर शुरु से वीजा से जुड़े सवालों का साया दिखा. ब्रिटेन के करीब तीन दर्जन कारोबारियों के दल के साथ भारत आई मे ने बेंगलुरू में कुछ स्थानीय स्टार्ट अप उद्यमियों से मुलाकात की और ब्रिटेन में अपने दो केंद्र चलाने वाली भारतीय कंपनी डायनामाइट टेक्नोलॉजीज की फैक्टरी का भी दौरा किया.

भारत ब्रिटेन से भारतीयों के लिए वीजा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की मांग करता रहा है. इसमें ब्रिटेन में पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को वहां रूकने देने और भारतीय पेशेवरों को वीजा में ढील दिए जाने की मांगे शामिल हैं. इस पर टेरीजा मे ने कहा कि एक बार ब्रिटेन यूरोपीय संघ को छोड़कर अलग हो जाए तो फिर भारत के साथ कोई भी व्यापारिक समझौता करने के लिए उसे इसकी कोई जरूरत नहीं होगी. टेरीजा मे के अनुसार फिलहाल ब्रिटेन में वीजा का "बढ़िया सिस्टम" मौजूद है. भारतीयों को वीजा दिया जाने का मुद्दा ब्रिटेन के लिए एक विवादास्पद स्थानीय मुद्दा भी है.

प्रधानमंत्री मे ने कहा, "यूरोपीय संघ छोड़ने से हमारे सामने तमाम मौके खुलेंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं उनका पूरा फायदा उठाउंगी और इसीलिए मैं यहां भारत आई हूं." मे ने बताया कि उनके दो दिन दौरे पर करीब एक अरब पाउंड के मूल्य वाले समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं.

प्रधानमंत्री मे सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलीं. मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ईयू से निकलने के बाद "दुनिया से मुंह नहीं मोड़ लेगा" बल्कि सभी पक्षों के लिए फायदेमंद नए आर्थिक संबंध स्थापित करेगा. प्रधानमंत्री बनने से पहले टेरीजा मे गृह मंत्री भी रही हैं और उन्हें आप्रवासन के मामलों में काफी सख्त रवैया रखने वाली माना जाता है. जून में ब्रिटेन में हुए ब्रेक्जिट रेफरेंडम में भी आप्रवासन से नाराज लोगों ने ईयू से बाहर निकलने के लिए वोट दिया था.

ब्रिटेन का सुप्रीम कोर्ट 5 दिसंबर से चार दिनों तक ब्रेक्डिट पर सरकार की एक अपील पर सुनवाई करेगा. सरकार ने हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ अपील की है कि ब्रेक्जिट की प्रक्रिया को शुरु करने से पहले सरकार को संसद से मंजूरी लेनी होगी. सरकार ने मार्च 2017 में ब्रेक्जिट की प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से शुरु किए जाने की घोषणा की है.

आरपी/एमजे (एएफपी, डीपीए)

 

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