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दुनिया

भविष्य के लिए चेतावनी है हार्वे तूफान

बारिश बंद होने तक हार्वे तूफान दक्षिण पूर्वी टेक्सस में हर इंसान के लिए लगभग 400 अरब लीटर पानी छोड़ेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग भविष्य में कितने भयानक तूफान ला सकती है, हार्वे बस इसकी एक झलक भर है.

हार्वे तूफान की तबाही पर वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इस बात को निर्धारित नहीं कर पाए हैं कि इस तूफान की वजह जलवायु परिवर्तन है या नहीं, लेकिन वे इस बात को भांप रहे हैं कि गर्म हवा और गर्म पानी का अर्थ है भविष्य में और अधिक तीव्र तूफानों की संभावना.

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के जलवायु वैज्ञानिक माइकल ओपनहेइमर कहते हैं, "यह वो चीज है जिसका हम और अधिक सामना करेंगे. इस तूफान को एक चेतावनी की तरह देखना चाहिए." कोई तूफान जलवायु परिवर्तन की वजह से हुआ है या नहीं इसे निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक रूप से स्वीकार की गयी प्रक्रिया है. लेकिन इसमें जटिल गणनाएं शामिल हैं जो हफ्तों और महीनों का समय ले सकती हैं और उससे भी ज्यादा समय लग सकता है उसे सहकर्मी और अन्य वैज्ञानिकों से पास कराने में.

सामान्य तौर पर, हालांकि, जलवायु वैज्ञानिक इस बात को स्वीकार करते हैं कि भविष्य में आने वाले तूफानों में उससे भी ज्यादा बारिश होगी जितनी पहले के तूफानों में कभी हुई है. कई वैज्ञानिकों का कहना है कि क्योंकि गर्म हवाओं में ज्यादा पानी रहता है इसलिए हर एक डिग्री बढ़ते तापमान के साथ चार गुना पानी बनेगा और बारिश या तूफान के रूप में वापस जमीन पर आएगा.

ग्लोबल वॉर्मिंग का मतलब गर्म होते समुद्र भी हैं. और गर्म पानी तूफानों को बढ़ाने की सबसे बड़ी जगहों में से एक हैं. भूमिगत मौसम विज्ञान के विशेषज्ञ जेफ मास्टर्स कहते हैं कि जब हार्वे तूफान टेक्सस की ओर बढ़ा, मैक्सिको की खाड़ी में तापमान सामान्य से 2 डिग्री अधिक था. 

एमआईटी मौसम विज्ञान के प्रोफेसर केरी इमानुएल द्वारा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि रॉकपोर्ट, टेक्सस में इस तरह की बारिश का औसत 1800 साल में एक बार का था. लेकिन 2010 से लगातार बढ़ रहे तापमान की वजह से यह औसत घट कर 300 साल हो गया है.

वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर बड़ी बहस चल रही है कि क्या टेक्सस में आई इस भयानक बाढ़ के पीछे ग्लोबल वॉर्मिंग भी एक वजह है. अगर यह यह भयंकर तूफान सामान्य आंधी की तरह बढ़ा होता तो इसने एक ही जगह पर इतना पानी नहीं बरसाया होता. हार्वे एक ही जगह पर इकट्ठा हुआ और बरसा क्योंकि यह दो हाई प्रेशर वाले स्थानों के बीच में बना जो इसे विपरीत दिशाओं में धकेलता रहा.

ओपनहेइमर और कुछ अन्य सिद्धांतों के अनुसार इस तरह के ब्लॉक बनने का संबंध आर्कटिक में पिघलती बर्फ से भी है, जो इस तरह की जटिल परिस्थितियां दिन पर दिन आम बनाता जा रहा है. लेकिन अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.

12 साल बाद अमेरिका में हार्वे के रूप में इतना ताकतवर तूफान आया, जो सबकुछ मटियामेट करता हुआ आगे बढ़ता. इस तूफान की रफ्तार 215 किलोमीटर प्रतिघंटे की थी. तीन घंटे के कोहराम के बाद हार्वे कुछ कमजोर पड़ा, लेकिन इसके बावजूद हवाओं की रफ्तार 201 किलोमीटर प्रतिघंटा बनी रही. रॉकपोर्ट और पैट्रिक रियोस जैसे शहरों को खाली करा लिया गया था. इससे पहले अमेरिका में 2005 में दो बेहद शक्तिशाली तूफान कैटरिना और विल्मा आए थे. दोनों ने 2000 से ज्यादा लोगों की जान ली.

एसएस/ओएसजे(एपी) 

 

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