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विज्ञान

भविष्य की ऊर्जा की तलाश

सूर्य की रोशनी से बिजली, बैट्री से कार और पवन चक्कियों से टिकाऊ ऊर्जा. साफ सुथरी और भविष्य के लिए टिकाऊ विकल्प पर चर्चा के लिए अबु धाबी में विश्व भविष्य ऊर्जा की शिखर बैठक आज से शुरू हो रही है.

अबु धाबी के राजकुमार शेख मुहम्मद बिन जायेद की पहल पर शुरू हुए इस कार्यक्रम में हर साल हिस्सा लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है और इसकी वेबसाइट का दावा है कि इस साल 150 से ज्यादा देश इसमें हिस्सा लेने वाले हैं. बैठक में नीति निर्माता, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और निवेशक जमा हो रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां "प्रोजेक्ट बनाने वाले और रास्ता सुझाने वाले निवेशकों और खरीदारों से सीधा" मिल सकते हैं.

आयोजकों की वेबसाइट पर कहा गया है, "यहां 615 कंपनियां, करीब 26,000 लोग, 155 देश आधुनिकतम तकनीक और बिजनेस के हजारों मौके लेकर आ रहे हैं." बताया गया है कि भारत और जर्मनी सहित कई देशों के विशेषज्ञ आने वाले दिनों की ऊर्जा और ऊर्जा स्रोतों पर चर्चा में हिस्सा लेंगे.

अबु धाबी अरब क्षेत्र में तेजी से वैकल्पिक ऊर्जा पर खर्च बढ़ा रहा है और इलाके में इस क्षेत्र में नेतृत्व करना चाहता है. यह अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (इरेना) का मुख्यालय भी है और बार बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोबारा इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा में योगदान की बात कह चुका है. इसके अलावा यह तेल और प्राकृतिक गैसों का गढ़ है. अबु धाबी विकास कोष ने वादा किया है कि वह हर साल करीब 5 करोड़ डॉलर अक्षय ऊर्जा के विकास में देगा, ताकि 2020 तक दोबारा इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल सात फीसदी बढ़ाया जा सके.

युवा भागीदारी

सरकारी मदद से आयोजित होने वाली शिखर बैठक में उद्योग जगत के जाने माने नामों के अलावा युवाओं की भी खास भागीदारी होती है. इसमें युवा भविष्य ऊर्जा नेता के नाम से एक कार्यक्रम होता है, जिसमें छात्रों और युवा रिसर्चरों को शामिल किया जाता है. इसका उद्देश्य उनके बीच ऊर्जा के सही इस्तेमाल को लेकर जागरूकता फैलाना है.

जर्मनी जैसे कई देश वैकल्पिक ऊर्जा को लेकर गंभीर हैं और दुनिया भर से अपील कर रहे हैं कि वे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल करें. बैट्री से चलने वाली कार भी इसी दिशा में एक कदम है. हालांकि करीब ढाई दशक के बाद भी बैट्री से चलने वाली कार को लेकर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पाया है.

अबु धाबी के सम्मेलन में इसके साथ ही पानी के प्रबंधन और कचरे के निपटारे पर भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहे हैं, जो 22 जनवरी तक चलेंगे.

एजेए/आईबी (एजेंसियां)

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