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खेल

भज्जी से बैट खान से गेंद सपना सचिन

इस वक्त कोई खिलाड़ी अगर जहीर खान के बदले भारतीय टीम में शामिल होता है तो यह उसके लिए बड़ी बात है. जयदेव उनादकट इस बात के बड़प्पन को महसूस कर रहे हैं और जानते हैं कि इस एक मैच से वह अपने करियर की दिशा उलट या पलट सकते हैं.

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जहीर के जाने के बाद

भारत में हाल ही के दिनों में उभरे बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों की कड़ी में जयदेव उनादकट नया नाम हैं. उन्हें नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले टेस्ट मैच के लिए टीम में शामिल किया गया है क्योंकि जहीर खान घायल होने की वजह से बाहर हो गए हैं. और उनादकट जहीर खान को ही अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं. वह कहते हैं, "जहीर मेरे आदर्श हैं. उन्हें देख देख कर ही मैंने बहुत कुछ सीखा है. यह मेरे लिए बड़ी बात है कि मुझे टेस्ट टीम में जगह मिली है और अगर मुझे खेलने का मौका मिला तो अपनी प्रतिभा को साबित करने की कोशिश करूंगा."

19 साल के इस नए क्रिकेटर के लिए बैटिंग में भी एक आदर्श है. नहीं, वह सचिन तेंदुलकर नहीं हैं. वीरेंद्र सहवाग या राहुल द्रविड़ भी नहीं हैं. वह हैं हरभजन सिंह. उनादकट हाल ही में दो लगातार शतक लगाकर सबको हैरान कर देने वाले भज्जी की तरह बैटिंग करना चाहते हैं. वह कहते हैं, "मैंने इससे पहले अपनी बैटिंग पर कभी काम नहीं किया. लेकिन अब मैं इस बारे में सोचूंगा. मैं हरभजन सिंह जैसा ऑल राउंडर बनना चाहता हूं. मैं उनसे भी जरूर सीखूंगा."

उनादकट ने अपनी बॉलिंग के जौहर सबसे पहले इंडियन प्रीमियर लीग में दिखाए. उसके बाद वह इंडिया ए टीम में शामिल होकर इंग्लैंड के दौरे पर गए और चयनकर्ताओं की निगाह में चढ़ गए. वह अपने पहले ही मैच में वेस्ट इंडीज की ए टीम के खिलाफ 13 विकेट लेकर चर्चा में आ गए.

आईपीएल में वह कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेले और शेन वॉर्न की राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों को आउट करके मैन ऑफ द मैच खिताब जीतने में कामयाब हुए. उनकी तारीफ दुनिया के महानतम तेज गेंदबाजों में शुमार वसीम अकरम ने की. वह अपनी सफलता का श्रेय अकरम को ही देते हैं.

उनादकट कहते हैं, "दादा (गांगुली) ने मुझे सिखाया कि मानसिक रूप से मजबूत कैसे बनते हैं. उन्होंने मुझे दबाव झेलने के लिए बहुत सारे टिप्स दिए. वसीम भाई ने मेरी गेंदबाजी पर काम किया. मैं एक बेहतर गेंदबाज बनने के लिए उन दोनों का ही शुक्रिया अदा करना चाहता हूं."

हालांकि किसी नए खिलाड़ी के सपनों में सचिन तेंदुलकर न हों, ऐसा कम से कम भारत में तो नहीं हो सकता. उनादकट के मामले में भी नहीं है. वह इस बात को लेकर खुश हैं कि जिस टीम में सचिन होंगे उसमें उन्हें जगह मिलेगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एन रंजन

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