ब्लैकबेरी सर्विस पर भारत अपने रुख पर कायम | विज्ञान | DW | 01.02.2011
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विज्ञान

ब्लैकबेरी सर्विस पर भारत अपने रुख पर कायम

भारत सरकार ने सोमवार को ब्लैकबेरी फोन निर्माता कंपनी रिसर्च इन मोशन (रिम) से कहा है कि उसे भारत में अपने ग्राहकों के कॉर्पोरेट ई-मेल सर्विस पर निगरानी रखने का अधिकार सरकार को देना ही होगा.

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इस संबंध में सरकार द्वारा रिसर्च इन मोशन को 31 जनवरी तक की समय सीमा दी गई थी जो सोमवार को खत्म हो गई. हालांकि इसका पता नहीं चल पाया है कि ब्लैकबेरी सर्विस पर पूरी तरह निगरानी के लिए सरकार की तरफ से क्या कदम उठाए जाएंगे. दूसरी तरफ इस मामले में अब तक रिम के किसी अधिकारी का कोई बयान नहीं आया है.

इससे पहले रिसर्च इन मोशन ने उम्मीद जताई थी कि भारत में ब्लैकबेरी सेवाओं पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा और कॉर्पोरेट ई-मेल सर्विस पर निगरानी के मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा. लेकिन भारत ने आज और स्पष्ट कर दिया कि रिम को अपने ग्राहकों के कॉर्पोरेट ई-मेल सर्विस पर निगरानी के लिए समाधान खोजना ही होगा.

भारत सरकार को आशंका है कि कश्मीर जैसे राज्यों में आतंकवादी ब्लैकबेरी सेवाओं का दुरुपयोग करके आतंकी हमलों को अंजाम दे सकते हैं, इसलिए वह चाहती है कि ब्लैकबेरी सेवाओं पर उसकी पूरी निगरानी रहे.

भारत ने रिम को 31 जनवरी तक का समय देते हुए कहा था कि वह ऐसा समाधान ढूंढे जिससे देश की खूफिया एजेंसियां ब्लैकबेरी की मैसेंजर सर्विस और कॉर्पोरेट ई-मेल सर्विस पर पूरी नजर रख सकें. वर्तमान में भारत में लगभग 11 लाख लोग ब्लैकबेरी इस्तेमाल कर रहे हैं. रिम ने भारत से कई बार कहा है कि वह अपने ग्राहकों के कॉर्पोरेट ई-मेल सर्विस पर सरकार की निगरानी नहीं चाहती, लेकिन भारत का रुख यही है कि कनाडा की यह कंपनी मैसेंजर सर्विस के साथ साथ कॉर्पोरेट ई-मेल सर्विस की भी निगरानी का समाधान ढूंढे.

रिपोर्टः एजेंसियां/एस खान

संपादनः ईशा भाटिया

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