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जर्मन चुनाव

ब्लैकबेरी ने घुटने टेके, भारत को देगा जानकारी

भारत सरकार के दबाव के आगे आखिरकर ब्लैकबेरी को झुकना पड़ा और वो अब अपने मैसेंजर सर्विस को डिकोड करने की जानकारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ बांटने के लिये तैयार हो गया. सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को दिए आदेश.

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भारत सरकार ने मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों को आदेश दिया है कि वो 31 अगस्त से पहले ब्लैकबेरी के मैसेंजर और मेल सिस्टम को रोकने और पढ़ने की तैयारी कर लें. देश में फिलहाल नौ कंपनियां अपने नेटवर्क पर ब्लैकबेरी फोन इस्तेमाल करने की सुविधा दे रही हैं. इनमें सरकारी कंपनियां बीएसएनएल और एमटीएनल भी शामिल हैं.ब्लैकबेरी ने कहा है कि एक सितंबर से वो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को ये सुविधा देने के काम में जुट जाएगी. अगले कुछ महीनों के भीतर ऐसे इंतजाम कर लिए जाएंगे कि सुरक्षा एजेंसियां ब्लैकबेरी से ब्लैकबेरी को भेजे जाने वाले संदेशों को डिकोड कर सकें.

BdT Bochumer Blackberry

संचार मंत्री ए राजा ने बताया कि जब तक ब्लैकबेरी देश में अपना सर्वर स्थापित नहीं कर लेती तब तक उसे ग्राहकों को मैसेंजर सेवा देने की अनुमति नहीं मिलेगी. भारत में करीब 10 लाख लोग ब्लैकबेरी हैंडसेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. लंबे समय से सरकार ब्लैकबेरी से उसकी मैसेंजर सेवा डिकोड करने की सुविधा मांग रही थी. ब्लैकबेरी बनाने वाली कंपनी रिम ये कहकर बचती रही कि उसका सर्वर चूंकि भारत में नहीं है इसलिए वो ये सेवा नहीं दे पाएगी. हालांकि ब्लैकबेरी कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों को ये सेवा दे रही है.

ब्लैकबेरी का मैसेंजर कोड काफी जटिल है और दूसरा इसका सर्वर भारत में नहीं होने के कारण इन संदेशों तक कोई सुरक्षा एजेंसी नहीं पहुंच सकती है. सरकार ने इंटरनेट की सेवा देने वालों के लिए पहले ही नियम बना रखा है कि ज्यादा जटिल कोड रखने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ेगा और इसे डिकोड करने की सेवा भारत सरकार के साथ बांटनी पड़ेगी. ब्लैकबेरी ने अपने फोन में इंटरप्राइज मेल और मैसेंजर के लिए भी ज्यादा जटिल कोड बना रखी है इसे डिकोड करने वाली की भी नहीं दे रही थी. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इन्हें पढ़ नहीं सकतीं. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इसका फायदा आतंकवादी संगठन उठा सकते हैं. मुंबई हमलों के बाद से ख़ासतौर से सरकार इन मामलों में मुस्तैदी दिखा रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः ए जमाल

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