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ब्लैकबेरी दूर करेगा भारत की चिंताएं

स्मार्ट मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी ब्लैकबेरी भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है. भारत के गृह मंत्रालय का कहना है कि वह जल्द ही इस पर काम करेगी और जल्द ही दोनों पक्षों में रजामंदी हो जाएगी.

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नई दिल्ली में भारतीय गृह मंत्रालय के विशेष सचिव उत्थान कुमार बंसल ने कहा, "ब्लैकबेरी ने गृह मंत्रालय को इस बात का भरोसा दिया है कि ब्लैकबेरी की निगरानी से जुड़ी चिंता जल्दी ही दूर हो जाएगी. मुझे उम्मीद है कि हम दोनों जल्द ही एक पन्ने पर आ जाएंगे और हमारी बातों को पूरा कर दिया जाएगा."

भारत सरकार कह चुकी है कि अगर कनाडा की ब्लैकबेरी ने उसे ग्राहकों के ईमेल और एसएमएस की पहुंच से अछूता रखा, तो ब्लैकबेरी को भारत में अपनी सेवाएं बंद करनी होंगी. पिछले सालों में ब्लैकबेरी ने मोबाइल टेलीफोन में क्रांति लाते हुए नए जेनेरेशन के फोन लांच किए, जो भारत सहित पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुए. भारत में 10 लाख से ज्यादा लोग ब्लैकबेरी फोन इस्तेमाल कर रहे हैं.

बंसल ने कहा कि भारत में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (डीओटी) ही टेलीफोन से जुड़ी नीतियां बनाती है और यह भारत के गृह मंत्रालय के साथ मिल कर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रही है. गृह मंत्रालय ने डीओटी को कह रखा है कि वह ब्लैकबेरी से इस बात को साफ शब्दों में बता दे कि सुरक्षा कारणों से ईमेल और एसएमएस से जुड़ी जानकारी की पहुंच भारत सरकार को होनी ही चाहिए और अगर ब्लैकबेरी ऐसा नहीं कर सकती तो हमें भारत में उसकी सेवाएं बंद करनी पड़ेंगी.

ऐसी खबरें हैं कि इसी वजह से ब्लैकबेरी को चीन में एक सर्वर लगाना पड़ा था. भारत सरकार इस बात की सत्यता जांच रही है. भारत चाहता है कि ब्लैकबेरी वहां भी एक सर्वर लगाए लेकिन कंपनी अभी तक इससे परहेज करती आ रही है. अगर सर्वर भारत में हो, तो संदेशों का पता लगाना आसान होगा. भारत सरकार का कहना है कि अमेरिका सहित कई दूसरे देशों में सुरक्षा चिंताओं की वजह से कंपनी ने ऐसे कदम उठाए हैं. ऐसे में भारत में इसके लिए इनकार करने की कोई वजह नहीं हो सकती.

ब्लैकबेरी का कहना है कि उसके सर्वर कनाडा में हैं और वहां के सर्वर से एसएमएस संदेशों को क्रैक करना बहुत मुश्किल है. हाल ही में भारत के वरिष्ठ सुरक्षा अफसरों की बैठक हुई, जिसमें उन्होंने चिंता जताते हुए कहा था कि ब्लैकबेरी जिस स्थिति में अभी भारत में अपनी सेवाएं दे रहा है, उससे सुरक्षा में गहरी सेंध लग सकती है.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः आभा एम

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