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विज्ञान

ब्लैकबेरी का बाद अब गूगल की बारी

दुनिया की सबसे स्मार्ट समझी जाने वाली फोन कंपनी ब्लैकबेरी को घुटने टेकने पर मजबूर करने के बाद अब भारतीय दूरसंचार विभाग गूगल और स्काइप पर नकेल डालने की तैयारी में है. सुरक्षा एजेंसियों की लिस्ट में अब ऑनलाइन कम्युनिकेशन.

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उत्तर पश्चिम में कश्मीर से लेकर उत्तर पूर्वी भारत तक आतंकवादियों से जूझ रही भारतीय सुरक्षा एजेंसियां चाहती हैं कि टेलिकॉम कंपनियां उन्हें सूचनाओं तक पहुंच बनाने का अधिकार दें. मोबाइल फोन पर तो उन्होंने शिकंजा कस दिया है. अब बारी ऑनलाइन कम्युनिकेशन की है. इसमें सबसे ऊपर है स्काइप और गूगल का नाम जो इंटरनेट के जरिए फोन पर बात कराने वाली सबसे बड़ी कंपनियां हैं.

Skype Internettelefonie

टेलिकॉम विभाग के एक बड़े अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि मंगलवार से इन कंपनियों के लिए भी जरूरी निर्देश जारी करने का काम शुरू हो जाएगा. अगर कंपनियां इन निर्देशों को मानती हैं तो ठीक, वरना उन्हें भी अपना कारोबार भारत से समेटना होगा. भारत सरकार कंपनियों के वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क पर भी निगाह जमाए हुए है. इस नेटवर्क के जरिए कंपनियों के अधिकारी ऑफिस से बाहर रहते हुए भी कंपनी का काम करते रहते हैं.

इस बीच ब्लैकबेरी बनाने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन यानी रिम ने भारत में सर्वर लगाने का प्रस्ताव रखा है जिसके जरिए ब्लैकबेरी के संदेश को भेजा जाएगा और सुरक्षा एजेंसियां इनकी निगरानी कर सकेंगी. ये सारी बातें गृह मंत्रालय से जारी एक बयान में कही गई हैं. मंत्रालय ने कहा है कि ब्लैकबेरी के संदेशों की कानूनी निगरानी का काम बहुत जल्द शुरू हो जाएगा. उधर रिम के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा है कि कंपनी ने ग्राहकों के हित के साथ कोई समझौता नहीं किया है.

जानकारी बताते हैं कि सुरक्षा को लेकर चिंतित रहने वाले दूसरे देश जैसे कि चीन और रूस ब्लैकबेरी से संतुष्ट हैं और उनकी सुरक्षा एजेंसियों को ब्लैकबेरी से जरूरी जानकारी मिल रही है. हालांकि यह पता नहीं चल सका है कि ब्लैकबेरी ने इन देशों के साथ किस तरह का समझौता किया है. इस बीच ब्लैकबेरी को यूएई की तरफ से भी चेतावनी मिल चुकी है और 11 अक्तूबर से पहले उसे वहां भी कोई वाजिब इंतजाम करना है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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