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ब्लॉग

ब्लाटर का इस्तीफा, फुटबॉल के लिए एक अच्छा दिन

पांचवी बार फीफा अध्यक्ष चुने जाने के फौरन बाद सेप ब्लाटर का मन परिवर्तन बहुत से सवाल खड़े करता है. डॉयचे वेले के खेल संपादक योशा वेबर का कहना है कि ब्लाटर के इस्तीफे से फीफा को आमूल परिवर्तन का मौका मिला है.

इंतजार करें, चुप रहें और मुस्कुरा कर सवालों को नजरअंदाज करते रहें. यह अब तक योसेप एस ब्लाटर की पहचान थी. एक बार उन्होंने फीफा के अनगिनत संकटों के बीच उल्टा पूछा था, संकट, संकट क्या होता है? अंजान होने के बदले रणनैतिक जवाब. सनातन ब्लाटर हर तरह की आलोचना से ऊपर लगने लगे थे. या यूं कहें, उनकी उसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी. अब तक.

वे जा रहे हैं. फुटबॉल की दुनिया में लोगों ने राहत की सांस ली है. उन्हें मुक्ति मिली है. फीफा को 40 साल तक हर रूप में प्रभावित करने वाले ब्लाटर ने इस्तीफा देने का फैसला किया है. फुटबॉल के लिए एक अच्छा दिन. इसके तीन कारण हैं.

उम्मीद की झलक

पहला: यह अच्छा दिन है क्योंकि ब्लाटर फुटबॉल की विश्व संस्था में सिस्टम बन गई भ्रष्टाचार की गंदी संस्कृति के लिए जिम्मेदार हैं. हालांकि खुद उनपर अब तक भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हुए हैं लेकिन इसके बारे में जानकारी होने के जरूर. अभियोक्ता कार्यालय के पास इस बात के सबूत हैं कि ब्लाटर को 14.2 करोड़ स्विस फ्रैंक की रिश्वत दिए जाने की जानकारी थी. ब्लाटर ने अपनी संस्था में भ्रष्ट गतिविधियों को रोकने के लिए कुछ नहीं किया. इसलिए अब तक फीफा के दर्जनों अधिकारियों पर, उनमें से बहुत से ब्लाटर के करीबी भी हैं, भ्रष्टाचार का संदेह है और उन्हें हिरासत में ले लिया गया है. जानकारी के बावजूद कुछ न करना उन्हें भ्रष्टाचारियों का सहयोगी बनाता है.

दूसरा: यह एक अच्छा दिन है क्योंकि फीफा को एक टुकड़ा विश्वसनीयता वापस मिली है. कम से कम उम्मीद जगी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सिर्फ बोलने का समय बीत गया. अक्सर पारदर्शिता की बात की जाती रही है लेकिन सब कुछ अंधेरे में रहा है.या फिर फेयरप्ले की लफ्फाजी. इसमें लिफाफों में रिश्वत की अंदर से आने वाली खबरें कहां फिट बैठती हैं जिसकी वजह से 1998 में ब्लाटर के अध्यक्ष पद का रास्ता साफ हुआ. और जिम्मेदारी भी ब्लाटर ने हाल के भ्रष्टाचार कांड में सिर्फ मुंहजबानी उठाई. खोखले शब्द, अब तक.

अब यूएफा की बारी

तीसरा: यह एक अच्छा दिन है क्योंकि नई शुरुआत का रास्ता खुल गया है. फीफा अपनी नई खोज कर सकता है. पुराने नियमों को ताक पर रख सकता है, भ्रष्ट अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकता है. हां, ब्लाटर को बहुत पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था. उनकी जीत ने उनके प्रतिद्वंद्वी की छवि को नुकसान पहुंचाया है और उन्हें आखिरी जीत दिलाई. इस तरह वे अविजीत चैंपियन के रूप में रिंग से बाहर निकल रहे हैं. फिर पूरे मामले का सकारात्मक पहलू भी है. बुरी तरह बंटे यूरोपीय संगठनों के इर्द गिर्द जमा विपक्ष फिर से इकट्टा हो सकता है. उसे अब इस बात की जिम्मेदारी लेनी होगी और दिखाना होगा कि बेहतर फीफा कैसा हो सकता है. मसलन इमानदारी से यह स्वीकार करे कि फीफा क्या है. वह स्विस कानूनों के मुताबिक छोटा गैर मुनाफे वाला संगठन नहीं है, बल्कि अरबों कमाने वाली बड़ी कंपनी है. यह स्वीकार करना भी बड़ी शुरुआत होगी.

मानना होगा कि इन दिनों काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं. ब्लाटर का इस्तीफा फीफा क्रांति की शुरुआत है, यह समय ही बताएगा. इसका मौका मौजूद है. अब सिर्फ एक शख्स की जरूरत है जो इस मौके को पकड़े.

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