ब्रेक्जिट से दुनिया भर के बाजारों में हाहाकार | दुनिया | DW | 24.06.2016
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

ब्रेक्जिट से दुनिया भर के बाजारों में हाहाकार

विश्व भर के वित्तीय बाजारों की नजर ब्रिटेन की जनता के ईयू के साथ रहने या अलग हो जाने के निर्णय पर लगी थी. देखिए नतीजे साफ होने पर कैसी रही दुनिया भर के मुख्य शेयर बाजारों की प्रतिक्रिया.

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ छोड़ने के फैसले से विश्व भर के स्टॉक बाजारों और तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई. यूके की मुद्रा पाउंड बीते तीन दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई.

एशियाई सरकारों ने वित्तीय बाजारों को स्थायी रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. टोक्यो स्टॉक्स में 2008 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. स्टॉक करीब 8 फीसदी गिरे. एशिया के दूसरे बाजार भी दिन के लिए बंद होने के समय तक घाटे में दिखे.

ब्रेक्जिट से सकते में आए निवेशकों ने सुबह बाजारों के खुलते ही फौरन ब्रिटिश स्टॉक्स को बेचना शुरु किया. फ्यूचर ट्रेडिंग वाले स्टॉक इंडेक्स लंदन के फुट्सी100 में करीब 8.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई. ब्रिटिश मुद्रा पाउंड जिसका कारोबार 24 घंटे होता है, 1985 से अपने सबसे निचले स्तर को छू चुका था.

बाजारों में आए इतने बड़े उथल पुथल पर निवेश विशेषज्ञ केन कोर्टिस ने बताया, "आप देख सकते हैं कि लोग किसी तरह बचना चाह रहे हैं." टोक्यो में स्टारफोर्ट इन्वेस्टमेंट होल्डिंग के अध्यक्ष कोर्टिस ने कहा कि निवेशकों ने ब्रिटेन के बाहर ना निकलने पर सट्टा लगाया था. अब जबकि नतीजे इसके उलट आए हैं तो आपको बाजार में "दूसरी दिशा में होता एडजस्टमेंट दिख रहा है." ब्रिटिश मुद्रा पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 5.7 फीसदी और यूरो के मुकाबले 4 फीसदी कमजोर पड़ी.

ईयू से बाहर निकलने के ब्रिटेन के फैसले के बाद अब ब्लॉक के बाकी 27 देशों के साथ व्यापार के अलावा, रक्षा और राजनीति से संबंधित लंबी चर्चाएं होंगी और नए नियम तय किए जाएंगे.

2015 में ब्रिटेन में अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाला तीसरा सबसे बड़ा स्रोत भारत था. फिलहाल ब्रिटेन में करीब 800 भारतीय कंपनियां कार्यरत हैं. इन कंपनियों ने वहां अपने मैनुफैक्चरिंग सेंटर भी खोले हुए हैं, जिन्हें ब्रेक्जिट के बाद अपनी कंपनियों का पुनर्गठन करना पड़ेगा.

भारत की इकोनॉमिक अफेयर्स सचिव शक्तिकांत दास ने बताया है कि भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आने वाले कई हफ्तों में होने वाले बदलावों के लिए तैयार हैं. उन्होंने साफ किया कि भारत को ब्रेक्जिट से कोई दीर्घकालीन नुकसान होने की आशंका नहीं है. भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा बाजार में रूपये में रेफरेंडम के नतीजों के बाद भारी गिरावट देखी गई.

कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फ्यूचर्स में भी रेफरेंडम के नतीजे के बाद बड़ी गिरावट देखी गई. जापानी मुद्रा येन फायदे में रही और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 4 फीसदी चढ़ी. माना जा रहा है कि निवेशक सुरक्षित मुद्रा के रूप में जापानी करेंसी की ओर लपके. जापान के वित्त मंत्री तारो आसो ने कहा, "मुद्रा बाजार में खास तौर पर काफी उतार-चढ़ाव दिख रहे हैं, हम नजदीकी से उन पर नजर रखे हुए हैं. समय रहते ठोस कदम उठाने के लिए भी तैयार हैं."

यूरोपीय बाजारों में खासकर बैंकिंग के स्टॉक्स के गिरने के कारण काफी गिरावट दर्ज हुई. रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड, बार्कलेज और लॉयड्स जैसे बैंकिंग स्टॉक्स अपने बाजार मूल्य का करीब एक चौथाई खो चुके हैं. लंदन में ओआंडा के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक क्रेग एर्लाम ने आगे की ओर इशारा करते हुए कहा, "सभी निगाहें अब दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों पर टिकी रहेंगी. यह देखने के लिए कि वे बाजार के इन बदलावों को लेकर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, खासकर इस पर कि बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान क्या करने वाले हैं."

पेरिस के सीएसी-40 इंडेक्स और फ्रैंकफर्ट के डैक्स इंडेक्स दोनों में एक समय 10 फीसदी तक की गिरावट दिखी. इस अवसर पर सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों ने सरकारी बॉन्डों को खरीदने में तेजी दिखाई. सोने में निवेश में भी दो सालों में सबसे अधिक तेजी देखी गई.

आरपी/एमजे (एपी,एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री