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मनोरंजन

ब्रिटेन में पढ़ाई के लिए बॉन्ड भरना होगा!

ब्रिटेन में डेविड कैमरन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार स्टूडेंट वीज़ा पर आने वाले छात्रों पर लगाम कसने की सोच रही है. सरकार ऐसी व्यवस्था लागू कर सकती है जिसमें छात्रों को ब्रिटेन आने से पहले बॉन्ड की रक़म चुकानी होगी.

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लंदन में ब्रिटेन के नए इमिग्रेशन मंत्री डेमियन ग्रीन ने संकेत दिया है कि भारत और अन्य ग़ैर यूरोपीय देशों से आने वाले छात्रों को ब्रिटेन के कॉलेजों में पढ़ने आने से पहले एक निश्चित राशि का बॉन्ड जमा कराना होगा.

डेमियन ग्रीन का कहना है कि छात्र वीज़ा के लिए फ़िलहाल प्वाइंट्स आधारित व्यवस्था में काफ़ी ख़ामियां हैं. डेमियन ग्रीन इमिग्रेशन मामलों पर कंज़रवेटिव पार्टी के प्रवक्ता भी रह चुके हैं और अब वह इमिग्रेशन सिस्टम में बड़े बदलाव लाने का वादा कर रहे हैं.

"हम उन छात्रों का स्वागत करना चाहते हैं जो वाक़ई पढ़ाई करने में दिलचस्पी रखते हैं. हम निष्पक्ष व्यवस्था भी चाहते हैं. हम अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए बॉन्ड सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहे हैं. इसके अन्तर्गत छात्र ब्रिटेन आने से पहले एक निश्चित रक़म का बॉन्ड जमा कराएंगे और जब वे पढ़ाई पूरी कर देश लौटेंगे तो उन्हें यह रक़म वापस दे दी जाएगी."

ब्रिटेन में प्रतिवर्ष आने वाले आप्रवासियों की संख्या में कमी लाने के लिए भारत और अन्य ग़ैर यूरोपीय देशों से उच्च दक्षता प्राप्त आप्रवासियों की संख्या को भी तय करने पर विचार चल रहा है. इन आप्रवासियों को हाइली स्किल्ड माइग्रेंट कहा जाता है.

ब्रिटेन समय समय पर कहता रहा है कि भारत से फ़र्ज़ी छात्र स्टूंडेट वीज़ा के बहाने ब्रिटेन में प्रवेश करते हैं और इमिग्रेशन नियमों को तोड़ते हैं. ब्रिटेन के मुताबिक़ फ़र्ज़ी छात्र वहां पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि काम करने के लिए जाते हैं. इसके मद्देनज़र पिछली लेबर सरकार ने कड़े क़दम उठाने का वादा करते हुए प्वाइंट्स आधारित व्यवस्था लागू की थी लेकिन इससे भी समस्या पर क़ाबू नहीं पाया जा सका.

इसी वजह से कुछ महीने पहले ब्रिटेन ने उत्तरी भारत, नेपाल और बांग्लादेश में स्टूडेंट वीज़ा के लिए आवेदन स्वीकार करने पर अस्थायी रोक लगा दी थी क्योंकि कई शहरों से ब्रितानी उच्चायोग को रिकॉर्ड संख्या में आवेदन मिल रहे थे.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: महेश झा

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