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ताना बाना

ब्रिटेन में चुनाव 6 मई को, एलान आज

ब्रिटेन में 6 मई को नए आम चुनाव होंगे. प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन मंगलवार को महारानी एलिजाबेथ से मिलकर संसद को भंग करने को कहेंगे. फिर वह चुनाव की तारीख का एलान कर सकते हैं. पर सत्ताधारी लेबर पार्टी के सितारे गर्दिश में.

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प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन

तारीख की घोषणा के बाद राजनीतिक पार्टियों के पास चुनाव प्रचार के लिए महीने भर का समय होगा. इस बार के चुनाव को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल लग रहा है कि कौन किस पर भारी पड़ेगा. पिछले 13 साल से लेबर पार्टी सत्ता में है, लेकिन हो सकता है कि इस बार रूढ़ीवादी कंजरवेटिव पार्टी बाजी मार ले. हालांकि जनमत संग्रहों के मुताबिक दोनों के बीच महज चार अंकों का अंतर बताया जा रहा है. यानी कंजरवेटिव पार्टी को थोड़ी सी बढ़त है लेकिन लेबर पार्टी अब भी मैदान से बाहर नहीं हुई है.

वैसे ब्रिटेन में ऐसा कम ही होता है जब किसी एक पार्टी को बहुमत न मिले. अगर किसी एक पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ है तो सरकार के गठन में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी जैसे छोटे दलों की भूमिका अहम हो जाएगी. उधर भावी चुनाव नतीजों को लेकर बाज़ार में अभी से काफी हलचल है क्योंकि आने वाली सरकार को 12 प्रतिशत के बजट घाटे से जूझना पड़ेगा.

औपचारिक तौर पर ब्रिटेन आर्थिक मदी से निकल चुका है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था चुनाव प्रचार और आने वाली सरकार की नीतियों का केंद्र बनी रहेगी. प्रधानमंत्री ब्राउन ने सोमवार को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अपनी सरकार की नीतियों का बचाव किया और इसे ब्रिटिश फ़ुटबॉल में वेन रूनी के पैर में मोच से भी जोड़ा. उन्होंने कहा, "अगर हम इलाज से पीछे हटते हैं और ऐसे पेश आते हैं जैसे हमे कुछ नहीं हुआ है तो हम गलती कर रहे हैं.चोट के बाद ठीक होने के लिए आपको सहारे की ज़रूरत होती है."

ब्रिटेन का बजट घाटा इस वक़्त 170 अरब पाउंड को छू रहा है. चुनाव जीतने वाली पार्टी को सबसे पहले देखना होगा कि इस घाटे को कम कैसे किया जाए. नई सरकार को अपने खर्चे में भारी कमी करनी पड़ेगी. सत्ताधारी लेबर पार्टी के साथ साथ विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी लोगों को अपनी नीतियों से लुभाने की कोशिश में हैं. माना जा रहा है कि पिछले साल न्याय मंत्रालय के सदस्यों पर भत्ते को लेकर उठे विवाद से लेबर पार्टी के वोटों पर असर पड़ सकता है. उधर कंजरवेटिवों के प्रमुख डेविड कैमरन ने कहा है कि वे बजट घाटे को कम करने के साथ साथ कर्मचारियों के वेतन पर लगने वाले टैक्स को नहीं बढ़ाएंगे.

इस हफ्ते के अंत तक ब्रिटिश संसद भंग होने से पहले अपना बचा खुचा काम पूरा कर देगी. आने वाले दिनों में सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंग्लैंड नई दरों का खुलासा करेगी. साथ ही उत्पादन और उद्योग पर जानकारी प्रकाशित की जाएगी. अप्रैल के अंतिम हफ्ते में बेरोज़गारी और पिछले तीन महीनों में सकल घरेलू उत्पाद पर सरकारी आंकड़ें पेश किए जाएंगे. इन सब जानकारियों का असर चुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है.

इस बार ब्रिटेन के चुनावों में कई नई बातें शामिल हो रही हैं. पहली बार 29 अप्रैल को कंजरवेटिव पार्टी के प्रमुख कैमरन, प्रधानमंत्री ब्राउन और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया निक क्लेग एक टीवी बहस में हिस्सा लेंगे जो पूरे देश में प्रसारित होगी. इसके अलावा बचत करने के लिए कई चुनाव क्षेत्रों में रात को वोटों की गिनती नहीं की जाएगी और इन जगहों से चुनाव के नतीजे 7 मई की शाम से ही आना शुरू होंगे.

मंगलवार को ब्राउन यह भी एलान करेंगे कि नई सरकार बनने के बाद संसद का नया सत्र कब शुरू होगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/एम गोपालकृष्णन

संपादनः ए कुमार

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