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दुनिया

ब्रिटेन में गैर ईयू देशों के लिए वीज़ा में कटौती

ब्रिटेन में गैर यूरोपीय संघ देशों के पेशेवरों के लिए वीज़ा की संख्या घटाने पर भारत ने चिंता जताईं. वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा, विकसित देशों को उभरती आर्थिक शक्तियों के खिलाफ संरक्षणवादी रवैया नहीं अपनाना चाहिए.

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वीजा की संख्या घटी

वाणिज्य मंत्र आनंद शर्मा ने ब्रिटिश सरकार को याद दिलाई है कि ब्रिटेन में अमेरिका के बाद भारत सबसे बड़ा निवेशक है. इस समय ब्रिटेन में 500 से ज्यादा भारतीय कंपनियां मौजूद हैं. इतना ही नहीं, ब्रिटेन के बाद यहां सबसे ज्यादा नौकरियां भी भारतीय कंपनियां ही देती हैं. वाणिज्य मंत्री ने ब्रिटीश प्रधानमंत्री डेवि़ड कैमरन, विदेश मंत्री विलियम हेग और वाणिज्य मंत्री विंस केबल से मिलकर इस मसले पर चिंता जताई.

ब्रिटेन के गृहमंत्री ने इससे पहले यूरोपीय संघ ईयू से बाहर के देशों से आने वाले लोगों के लिए वीज़ा की संख्या 24,100 कर दी है. 2011 के अप्रैल तक इससे ज्यादा एक आदमी को भी ब्रिटेन में

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प्रधानमंत्री कैमरन

नौकरी करने आने की अनुमति नहीं मिलेगी. इसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा. गैर ईयू देशों से ब्रिटेन आने वाले पेशेवरों में भारतीय लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है. आईटी, मेडिसिन और शिक्षा के लिए काम करने वालों में भारतीय पेशेवरों का दबदबा है. वीज़ा की संख्या में कटौती कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रैट पार्टियों के बीच हुए समझौत में शामिल था. दोनों पार्टियां चाहती हैं कि देश में प्रवासियों की संख्या को 1990 के स्तर पर लाया जाए. हालांकि इस मसले पर हाई स्किल्ड माइग्रैंट्स फोरम जैसे कई असरदार संगठन विरोध करने की तैयारी में हैं. फोरम के कार्यकारी निदेशक अमित कपाड़िया का कहना है कि गैर ईयू देशों से आए ज्यादातर लोग यहां दक्ष पेशेवरों की कमी की वजह से आते हैं जिसे स्थानीय स्तर पर पूरा नहीं किया जा सकता.

रिपोर्टः एजेंसियां एन रंजन

संपादनः एम गोपालकृष्णन

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