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विज्ञान

ब्रिटेन में आठ साल का शोधकर्ता

ब्रिटेन के एक स्कूल के 8 से 10 साल तक के बच्चों ने एक साइंस प्रोजेक्ट बनाया. इस प्रोजेक्ट पर लिखा गया पेपर इतना बढ़िया है कि उसे दुनिया में जानीमानी रॉयल सोसाइटी ने प्रकाशित किया है. सोसाइटी ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ.

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ब्रिटेन की देवोन काउंटी के ब्लैकॉटोन प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने भौंरों पर एक अध्ययन किया है. बच्चों ने एक स्थानीय चर्च के बाग में कई दौर के प्रयोग किए और पता लगाया कि भौंरे रंगों को किस तरह देखते हैं.

शहर में ही रहने वाले एक वैज्ञानिक की मदद से 25 बच्चों के इस समूह ने इस अध्ययन के आधार पर कमाल का रिसर्च पेपर भी लिखा. इस पेपर को रॉयल सोसाइटी ने बायोलॉजी लेटर्स नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

इस बारे में रॉयल सोसाइटी ने बाकायदा बयान जारी कर दुनिया को बताया है. सोसाइटी ने कहा, "आम तौर पर कीट पतंगों के देखने के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी ही नहीं है. स्कूली बच्चों ने जो बातें पता लगाई हैं वे इस जानकारी को आगे बढ़ाने में काफी मददगार साबित होंगी."

स्कूल के हेडमास्टर डेव स्ट्रडविक अपने छात्रों की इस उपलब्धि पर गदगद हैं. उन्होंने कहा, "मेरे छात्रों ने अध्ययन के बारे में सोचा, उसे पूरा किया और फिर उसके बारे में लिखा. उन्होंने जो बातें पता लगाई हैं वे सटीक हैं और छापे जाने लायक हैं."

बच्चों ने अध्ययन के लिए कोई बड़े बड़े वैज्ञानिक फॉर्मूलों या उपकरणों का भी इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने तो पेंसिल रंगों की मदद से पैटर्न बनाए. और भौंरों की रंगों की जानकारी के बारे में पता लगाने के लिए उन्होंने मीठे और नमकीन पानी का प्रयोग किया. उन्होंने देखना चाहा कि भंवरे मीठे पानी की ओर जाते हैं या नमकीन पानी की तरफ. और इसके लिए वे रंगों से प्रभावित होते हैं या नहीं.

रिसर्च पेपर में बच्चों ने लिखा है, "किस रंग के फूल पर जाना है, यह पता लगाने के लिए भौंरे रंगों के मिश्रण का इस्तेमाल करते हैं. इस प्रयोग के दौरान हमने यह भी जाना कि विज्ञान एक मजेदार चीज है क्योंकि इसके जरिए आप वे काम करते हैं जो इससे पहले किसी ने नहीं किए."

बायोलॉजी लेटर्स के संपादक ब्रायन चार्ल्सवर्थ कहते हैं कि यह पेपर अपनी तरह का पहला है और गुणवत्ता के मामले में वर्ल्ड क्लास है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए जमाल

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