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दुनिया

ब्रिटेन ने विजय माल्या पर भारत की अर्जी ठुकराई

भारत को ब्रिटेन ने बड़ा झटका दिया है. विजय माल्या के प्रत्यर्पण की अर्जी को ठुकरा दिया गया है. इसके लिए कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया है.

साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाए बिना विदेश चले गए विजय माल्या को भारत लाना अब टेढ़ी खीर होगा. भारत तो उम्मीद कर रहा था कि ये प्रत्यर्पण बड़े आराम से हो जाएगा लेकिन दो हफ्ते तक इंतजार कराने के बाद ब्रिटेन ने भारत को ठेंगा दिखा दिया.

ब्रिटेन ने भारत से कहा है कि विजय माल्या को डिपोर्ट नहीं किया जा सकता. विजय माल्या पर भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में केस दर्ज हुआ है. लेकिन वह पकड़ में आने से पहले ही ब्रिटेन चले गए थे. भारत ने ब्रिटेन से उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था लेकिन ब्रिटेन ने यह अनुरोध ठुकरा दिया है.
भारत के अनुरोध भेजने के करीब दो हफ्ते बाद ब्रिटेन ने जवाब दिया है. विजय माल्या का पासपोर्ट पहले ही रद्द किया जा चुका है. उन पर मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट 2002 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. खबरों के मुताबिक माल्या पर बैंकों का लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रुपया बकाया है. उनके खिलाफ गैरजमानती वॉरंट जारी हो चुका है.

विदेश मंत्रालय ने बताया है कि ब्रिटेन ने भारत का अनुरोध ठुकरा दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, ''यूके सरकार ने हमें सूचित किया है कि 1971 के इमिग्रेशन ऐक्ट मुताबिक किसी व्यक्ति के पास वैध पासपोर्ट ना भी हो तो भी वह ब्रिटेन में तब तक रह सकता है जितनी इजाजत उसे वैध पासपोर्ट के रहते दी गई थी.''

स्वरूप के मुताबिक ब्रिटेन ने भारत की चिंता और मामले की गंभीरता को समझा है. उन्होंने बताया, ''यूके ने आरोपों की गंभीरता को माना है कि वे लोग जांच में भारत सरकार की मदद को तैयार हैं. उन्होंने भारत सरकार से कहा है कि कानूनी मदद में साझेदारी पर विचार करे.''

1993 में भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यार्पण संधि हुई थी. इसके तहत माल्या का प्रत्यर्पण किया जा सकता है. 1992 की म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत भी कानूनी मामलों में कोई मदद ली या दी जा सकती है. लेकिन भारत की उम्मीदों को ब्रिटेन के जवाब से झटका लगा है. भारत उम्मीद कर रहा था कि शराब व्यापारी विजय माल्या का सीधा प्रत्यर्पण ही हो जाए क्योंकि दूसरी कानूनी प्रक्रिया बहुत लंबी है.

भारत में यह मुद्दा राजनीतिक भी बन चुका है क्योंकि विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने मामला सामने आने के बावजूद विजय माल्या को देश से बाहर जाने कैसे दिया. विजय माल्या जब ब्रिटेन चले गए थे तो उन्होंने वहां से ट्वीट करके कहा था कि वह भागे नहीं हैं और काम के सिलसिले में आए हैं लेकिन वह भारत जरूर लौटेंगे. ऐसा ही मामला यूपीए सरकार के वक्त में ललित मोदी का था जो ब्रिेटेन चले गए थे. उन्हें भी वापस नहीं लाया जा सका है.

वीके/आरपी (पीटीआई)

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