ब्राजील में बढ़ती मानव तस्करी | दुनिया | DW | 08.06.2013
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दुनिया

ब्राजील में बढ़ती मानव तस्करी

21वीं सदी में जहां एक तरह मानवाधिकारों की चर्चा चल रही है, तो वहीं ब्राजील में मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरों का मामला गर्म हो रहा है. हाल ही में 80 बांग्लादेशियों को छुड़ाया गया.

कुछ समय पहले आई क्वेनटीन टैरेनटीनो की फिल्म 'जैंगो अनचेंड' ने उस जमाने पर रोशनी डाली जब अफ्रीका में लोगों को गुलाम बनाया जाता था. लेकिन ब्राजील में गुलामी पर रोक लग जाने के 125 साल बाद भी हालात ऐसे हैं कि हजारों लोग मानव तस्करी का शिकार बन रहे हैं. इन लोगों को बहला फुसला कर, अच्छी नौकरी के सपने दिखा कर गरीब देशों से ब्राजील लाया जाता है. वे विदेश में एक उज्जवल भविष्य और गरीबी से छुटकारा पाने के सपने संजो कर ब्राजील पहुंचते हैं, लेकिन सीमा पार होते ही सामने आती है एक डरावनी सच्चाई. हैरानी की बात यह है कि बड़ी कंपनियां भी इसमें भागीदार हैं.

हाल ही में पड़े छापे बताते हैं कि जारा और गैप जैसे कंपनियों के लिए कपड़ा तैयार करने वाले मजदूर दरअसल तस्करी कर ब्राजील लाए गए. कंपनियां सस्ते मजदूरों की तलाश में होती हैं, और बाजार में इन लाचार लोगों से सस्ता और कोई विकल्प मौजूद नहीं. मानवाधिकारों का हनन करती ये कंपनियां भले ही इस से अनजान बनें, लेकिन सच्चाई यह है कि 1995 से ले कर अब तक ब्राजील में 44,000 लोगों को गुलामी जैसे स्थिति से बाहर निकाला गया है.

ब्राजील पर नजर

ब्राजील में अगले साल फुटबॉल वर्ल्ड कप खेला जाना है. इसके अलावा 2016 में वहां समर ओलम्पिक खेलों का आयोजन भी होना है. यही वजह है कि दुनिया की नजरें अब ब्राजील पर हैं. पिछले हफ्ते जिन 80 बांग्लादेशी मजदूरों को छुड़वाया गया उन्होंने बताया कि ब्राजील आने के लिए उनसे 10,000 डॉलर लिए गए थे और वादा किया गया था कि वे महीने में 1,000 से 1,500 डॉलर तक कमाया करेंगे. तस्करी केवल बांग्लादेश से ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, श्रीलंका, नाइजीरिया, बोलीविया, पेरू, इक्वाडोर और सेनेगल जैसे कई देशों से हो रही है. इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सीमाओं पर सेना को भी तैनात किया है, लेकिन तस्करी करने वाले उन्हें चकमा देने में सफल रहते हैं.

ब्राजील में काम कर रहे एनजीओ का अनुमान है कि बोलीविया और पैराग्वे से अवैध रूप से आए लोगों की ही तादाद तीन लाख के पार है. मीडिया की ब्राजील पर नजर के कारण इन दिनों एक बदलाव जरूर आया है. पहले तस्करी करने वाले लोग राजधानी ब्राजीलिया में ही फैले हुए थे, लेकिन अब ये शहर से दूर ऐसी जगहों पर हैं जहां ये मीडिया और पुलिस की नजर से बच सकें.

साओ पाओलो में ऐसी 50 फैक्ट्रियों को बंद कराया जा चुका है जहां लोगों से जबरन मजदूरी कराई जा रही थी. इन फैक्ट्रियों में लोगों से कम से कम 16 घंटे काम लिया जाता था. इस बीच चार संसदीय जांच समितियां भी तैयार की गयी हैं. नए नियमों के अनुसार साओ पाओलो में यदि इस तरह की और कोई फैक्ट्री मिलती है तो 10 साल तक के लिए उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा.

रिपोर्ट: आस्ट्रिड प्रांगे/ ईशा भाटिया

संपादनः एन रंजन

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