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मंथन

ब्रह्मांड की चार अदृश्य ताकतें

हमारे ब्रह्मांड की रचना में चार बलों की मुख्य भूमिका है. ये ताकतें आज भी हमारे चारों तरफ हर चीज में छुपी हैं. वैज्ञानिक इनकी पहचान तो कर चुके हैं लेकिन इन्हें एक साथ कैसे लाया जाए, ये समझ नहीं आ रहा है.

हमारा ब्रह्मांड, आखिर इसका जन्म कैसे हुआ, क्यों हुआ और ये ऐसा क्यों है? प्रकाश की रफ्तार आखिर तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकेंड क्यों है, 10 लाख क्यों नहीं. इन सवालों का उत्तर देने के लिए वैज्ञानिकों को ऐसा सिद्धांत चाहिए जो हर भौतिक शक्ति को शामिल करे. अल्बर्ट आइनस्टाइन भी करीब तीस साल तक इस खोज में लगे रहे.

अब वैज्ञानिक सर्न की प्रयोगशाला लार्ज हैड्रोन कोलाइडर की मदद से इस लक्ष्य के और करीब जाना चाह रहे हैं. इसके लिए पार्टिकल एक्सलेरेटर को इस तरह बदला गया है कि वो जल्द ही इतनी ऊर्जा पैदा कर सकेगा जितनी आज तक नहीं हुई. इतनी कि वह अब तक नहीं देखे गए कण पकड़ में आ सकें. बीते सौ सालों में वैज्ञानिक तत्व के भीतर लगातार गहराई में जा रहे हैं.

कणों के दो समूह

हर चीज, जो हमारे चारों ओर है, विज्ञान इसे बैरियोनिक मैटर कहता है, वैज्ञानिक इसे कुछ बिल्डिंग ब्लॉक्स के सहारे समझाते हैं. इसे स्टैंडर्ड मॉडल कहा जाता है. फिलहाल कणों को दो ग्रुपों में बांटा गया है.

एक जिससे तत्व बनते हैं, दूसरे जो कणों का गुच्छा होते हैं और ऊर्जा ट्रांसफर करते हैं. लेकिन स्टैंडर्ड कहा जाने वाला मॉडल कई जरूरी सवालों के उत्तर नहीं देता. मसलन डार्क मैटर क्या है. डार्क मैटर में ऐसा कोई कण नहीं जो गुरुत्व ऊर्जा ट्रांसफर करता हो.

इसी कमी के चलते भौतिक विज्ञानियों को अपने सिद्धांत को आगे बढ़ाना पड़ा और हर कण का विशेष गुणों वाला पार्टनर खोजना पड़ा. इन्हें सुपरसीमेट्रिक पार्टिकल्स कहा जा रहा है. एलएचसी (लार्ज हैड्रोन कोलाइडर) में इन्हीं सुपरसीमेट्रिक पार्टिकल्स को ट्रैक करने की कोशिश की जाएगी. अगर ऐसा हुआ तो यूनीफाइड फील्ड थ्योरी कहे जाने वाले सिद्धांत की तरफ एक बड़ा कदम होगा. लेकिन इसे वर्ल्ड फॉर्मूला कहा क्यों जा रहा है.

हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर थियोरेटिक फिजिक्स की गुडरिड मूर्टगाट-पिक इसका जवाब देती हैं, "क्योंकि यह एक ऐसा फॉर्मूला होगा जो सभी ताकतों की व्याख्या करेगा. आप इस फॉर्मूले के बारे में सोच ही नहीं सकते, लेकिन ये यहां फिट होता है. शायद हम इसे एक लैग्रेंज मॉडल में ढाल सकें. लेकिन ये यहां तक सीमित नहीं है. ये फॉर्मूला सारे पार्टिकल्स के एक दूसरे पर होने वाले असर को बताएगा और हर तरह के बल की व्याख्या कर सकेगा."

बलों का चतुर्भुज

ये मुख्य रूप से चार बल हैं. इनमें सबसे अहम है, गुरुत्व बल, ये द्रव्यमान वाली हर चीज को प्रभावित करता है, हर दूरी पर. गुरुत्व बल वर्ल्ड फॉर्मूला का प्रतिरोध करता है. आइंस्टाइन ने इसे सापेक्षता के सिद्धांत से समझाने की कोशिश की थी.

विद्युत चुंबकीय बल भी हर दूरी से असर करता हैं. वह परमाणु और अणु की संरचना को भी प्रभावित करता है. बाकी दो बल परमाणु के नाभिकीय स्तर पर काम करते हैं.

शक्तिशाली नाभिकीय ऊर्जा अणुओं को बांधे रखती है और कमजोर नाभिकीय ऊर्जा रेडियोधर्मी विघटन को दर्शाती है. यूनीफाइड फील्ड थ्योरी में ये सारे बल समाहित होने चाहिए.

बिग बैंग के बाद जब ब्रह्मांड की रचना हुई तब भी चार मूलभूत बल एक साथ थे. इसीलिए मौजूदा सिद्धांत यह नहीं बताता कि उस वक्त परिस्थितियां कैसी थीं. भौतिकशास्त्री अब इसी शुरुआत के मूल में जाना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें इन चार मुख्य बलों को एक बार फिर साथ लाना होगा.

फिलहाल स्ट्रिंग थ्योरी पर सबसे ज्यादा ध्यान है. इसके मुताबिक सब कुछ सूक्ष्म रेशों से बना है. यानी स्ट्रि्ंग्स. हालांकि इन रेशों को कभी कोई सीधे तौर पर नहीं देख सकता. वैज्ञानिकों को लगता है कि इस रेशों के आपस में जुड़ने और फिर फैलने से ब्रह्मांड का विस्तार हुआ. अगर पार्टनर पार्टिकल्स की थ्योरी सही साबित हुई तो स्ट्रिंग थ्योरी को सहारा मिलेगा.

रिपोर्ट: कोरनेलिया बोरमन/ओएसजे

संपादन: महेश झा

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