1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

खेल

बोल्ट के इंतजार में कॉमनवेल्थ

भ्रष्टाचार और लेट लतीफी वाले दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद बुधवार से स्कॉटलैंड में 30वें राष्ट्रमंडल खेल शुरू हो रहे हैं. इस बार चर्चा स्टेडियमों और सुविधाओं की नहीं, छह बार के ओलंपिक चैंपियन यूसैन बोल्ट की हो रही है.

हालांकि जमैका के सुपर स्टार बोल्ट 100 या 200 मीटर की दौड़ में हिस्सा नहीं लेंगे, वह सिर्फ 4X100 मीटर रिले दौड़ में शिरकत करेंगे. लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे तेज इंसान को ग्लासगो के स्टेडियम पर दौड़ता देखना हर कोई चाहेगा.

यह तीसरा मौका है, जब स्कॉटलैंड कॉमनवेल्थ खेलों का आयोजन कर रहा है. 1930 में इन खेलों की शुरुआत हुई और अब 17 तरह के मुकाबलों की प्रतियोगिता होती है. ग्लासगो के सेल्टिक पार्क में एक विशाल उद्घाटन समारोह होने वाला है, जिसमें रॉड स्टीवर्ट सहित बड़े कलाकार हिस्सा लेंगे. यहां 40,000 दर्शक जमा होने वाले हैं, जहां हिस्सा लेने वाले 71 देशों के झंडे भी नजर आएंगे.

Commonwealth Games Dorf

दिल्ली के इंतजाम पर उठे थे सवाल

हालांकि इसका महत्व 204 देशों वाले ओलंपिक जैसा तो नहीं है लेकिन फिर भी कॉमनवेल्थ देशों के लिए यह एक प्रतिष्ठित समारोह है, जहां 261 पदकों के लिए 2450 खिलाड़ी भिड़ेंगे.

जाहिर है कि सबसे ज्यादा नजर बोल्ट पर होगी, जबकि जमैका के योहान ब्लैक ने कॉमनवेल्थ में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है. लेकिन महिला वर्ग में जमैका की शेली-एन फ्रेजर-प्राइस जरूर हिस्सा लेंगी. अभी हाल ही में इन खिलाड़ियों का यूनाइटेड किंगडम में जमावड़ा हुआ था, जब वे लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने आए थे.

बोल्ट का कहना है, "मुझे स्कॉटलैंड से मेरे फैन्स के कई निमंत्रण मिले हैं. वे लोग एक शानदार खेल की उम्मीद लगाए हुए हैं."

दूसरी तरफ ब्रिटेन के मो फाराह को भी देखने को भीड़ जरूर उमड़ेगी, जिन्होंने लंदन ओलंपिक में 5000 और 10000 मीटर की रेस जीती थी. हालांकि इस सीजन में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. ब्रिटेन ने अपने घर पर हुए 2012 ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए 29 स्वर्ण पदक जीता था और वह तीसरे नंबर पर था.

ऑस्ट्रेलिया पिछले छह बार से लगातार पदक तालिका में पहला नंबर बनाता आया है और समझा जाता है कि इस बार भी वह पहले नंबर पर होगा. हालांकि दिल्ली खेलों में उसके खाते में 74 स्वर्ण सहित 178 पदक आए थे, जो इस बार घट सकते हैं. भारत को खास तौर पर अपने निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और पहलवान योगेश्वर दत्त और सुशील कुमार पर भरोसा है. पिछली बार के खेल में भारत ने आश्चर्यजनक तरीके से 38 स्वर्ण पदक जीते थे और वह ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर पर था. उसके बाद इंग्लैंड, कनाडा और केन्या थे.

एजेए/एमजे (एएफपी, डीपीए)