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खेल

बोर्ड ने मोदी को दिए हेराफेरी के चार सबूत

आईपीएल के निलंबित कमिश्नर ललित मोदी को उनकी कथित धांधलियों और हेराफेरी के सबूत में बीसीसीआई ने चार दस्तावेज सौंपे हैं. बोर्ड का कहना है कि वह और मामलों में दस्तावेज नहीं दे सकता क्योंकि वे मुंहजबानी आरोपों पर आधारित हैं.

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मोदी के वकील महमूद एस आबदी ने मुंबई में बताया कि ललित मोदी अपने नोटिस से संबंधित 10 बिन्दुओं पर बीसीसीआई से दस्तावेजी सबूत चाहते थे. लेकिन क्रिकेट बोर्ड ने सिर्फ चार मामलों में दस्तावेज सौंपे. आबदी ने बताया कि बाकी के बिन्दु जबानी और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित थे और उन मामलों में बीसीसीआई मुख्यालय ने कोई दस्तावेज नहीं दिया.

आबदी ने कहा, “हम बोर्ड से कुछ दस्तावेज चाहते थे. मोदी को जो कारण बताओ नोटिस दिया गया था, उसमें शामिल बातों को समझने के लिए हमने 10 बिन्दुओं पर दस्तावेजी सबूत मांगे थे. मंगलवार तक हमें सिर्फ चार दस्तावेज मिले.”

मोदी के वकील ने कहा, “बोर्ड के सचिव एन श्रीनिवासन ने मोदी को एक ईमेल लिख कर कहा है कि हम जिन दूसरे बिन्दुओं से जुड़े दस्तावेज चाहते हैं, वे सिर्फ जुबानी आरोप हैं और उनसे जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं है.”

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भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ने ललित मोदी को एक के बाद एक दो नोटिस थमाए हैं. पहले नोटिस का जवाब देने के लिए मोदी ने इन दस्तावेजों की दरयाफ्त की थी. यह नोटिस आईपीएल में वित्तीय अनियमितता और करीबियों को फायदा पहुंचाने के सिलसिले में है.

मोदी के वकील ने बताया कि जो चार दस्तावेज दिए गए हैं, उनमें एक समझौता पत्र, एक चिट्ठी, एक ईमेल की कॉपी और आईपीएल की एक टीम के शेयर बंटवारे से जुड़ी चीजें हैं. समझा जाता है कि चिट्ठी और ईमेल निम्बस कम्यूनिकेशन से जुड़े हैं. निम्बस के पास भारत में खेले जाने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के प्रसारण का अधिकार है. आबदी ने कहा, “उन्होंने अब तक हमसे कुछ और नहीं मांगा है. हमने सोमवार को उन्हें सारे दस्तावेज सौंपे थे. हमने अपनी तरफ से पूरी कागजी कार्रवाई कर दी है. लेकिन अगर बीसीसीआई कुछ और चाहेगा, तो हम जरूर मुहैया कराएंगे.”

आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को 26 अप्रैल को निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद उन्हें वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में कारण बताओ नोटिस दिया गया और 15 दिनों में जवाब मांगा गया. लेकिन आखिरी मौके पर बीसीसीआई ने उन्हें पांच अतिरिक्त दिनों की मोहलत दे दी. अब मोदी को 15 मई तक जवाब देना है. उनके वकील का कहना है कि नए घटनाक्रम के साथ ही कहानी में नया मोड़ आ गया है.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः महेश झा

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