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विज्ञान

बोतलबंद पानी से बढ़ती दिक्कत

दुनिया में जल संकट की बात हो रही है और बर्लिन में भूजल का स्तर ऊपर जा रहा है. पानी का इस्तेमाल घट रहा है, कीमत ऊपर जा रही है, पानी के तंत्र को चलाने का खर्च बढ़ रहा है सिर्फ इसलिए कि लोग नल का पानी नहीं पी रहे हैं.

पीने का पानी हर जगह है लेकिन पिया नहीं जाता, दूसरे कामों में इस्तेमाल होता है. तकनीक और आदतों में बदलाव ने सप्लाई होने वाले पानी का उपयोग घटा दिया है. बर्लिन में पानी पहुंचाने का तंत्र बहुत बड़ी आबादी और उद्योग को ध्यान में रख कर बनाया गया था लेकिन एकीकरण के बाद दोनों ने ही इसका इस्तेमाल नहीं किया. यहां पानी सप्लाई करने वाली एजेंसी से जुड़े येन्स फेडर्न बताते हैं कि हर साल पानी का उपयोग घटता जा रहा है. इसकी वजह है कपड़े धोने वाली मशीनें, शॉवर और बर्तन धोने की मशीन.

पानी का उपयोग घटने की वजह से उसकी कीमत बढ़ रही है. वो जोर दे कर कहते हैं, "बर्लिन में तो पानी बचाने की कोई जरूरत नहीं."

पानी का ज्यादा इस्तेमाल न होने की वजह से बर्लिन में भूजल स्तर उपर जा रहा है और शहर के कुछ इलाकों में तो तहखाने गीले ही रह रहे हैं. पूरे तंत्र में पानी का ज्यादा प्रवाह नहीं होने से सीवेज की तलछट बढ़ रही, बदबू फैल रही है और ज्यादा सफाई करनी पड़ रही है. फेडर्न की राय है, "अगर आप कुछ बचा सकते हैं तो सीओटू बचाइए. बोतल में पानी खरीद कर, इसे कार में रखने, घर लेकर आने और फिर 20 किलो का वजन लेकर सीढ़ियां चढ़ने की कोई जरूरत नहीं. इसका कोई मतलब नहीं क्योंकि हम यह मुफ्त में दे रहे हैं सीधे आपके नल में."

नल का पानी नहीं पीते

मोटे तौर पर जर्मनी पर्यावरण के साथ दोस्ताना रवैया अपनाने वाला देश है. लोग चीजों को खूब रिसाइकिल करते हैं, जैविक फूड और इलाके की फसलों से थाली सजाते हैं और तो और एक सक्रिय ग्रीन राजनीतिक पार्टी भी है. इतना सब होने पर भी पानी वो बोतलबंद ही पीते हैं जो आमतौर पर बीयर से महंगा होता है. यहां के सुपरमार्केट में जाइए तो तरह तरह के बोतलबंद पानी की भरमार दिखती है. गैस वाले, बिना गैस वाले या फिर तरह तरह के स्वाद वाले. घर के नलों में आने वाला पानी साफ और सेहतमंद है लेकिन फिर भी लोग पैसे खर्च कर पानी की बोतलें खरीदते हैं.

Berliner Wasserfest

नल का पानी पीने से परहेज करते हैं जर्मन

जर्मन लोगों को बोतलबंद पानी पीने की आदत छुड़ाने के लिए कुछ संगठन अस्तित्व में आए हैं जो पानी की थीम पर अलग अलग आयोजनों के जरिए लोगों को नल का पानी पिला रहे हैं. कोशिश है लोगों की आदत बदलने की. वासरफेस्ट के नाम से मशहूर हो रहे इस आयोजन के एक स्टॉल पर सैमुअल होएलर लोगों को दो गिलास में ठंडा पानी दे रहे हैं. एक में फ्रांस की एक कंपनी का पानी है और दूसरे में बर्लिन के नल का पानी. पीने वाला बर्लिन के पानी के बेहतर बताता है और सैमुअल के चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है. यूरोप में बोतलबंद पानी की आदत बदलने के लिए उनकी पहल का नाम है "टिप टैप."

बोतल में हैं तो बढ़िया है

दिक्कत यह है कि लोग नल के पानी को बेहतर नहीं मानते. सैमुअल के स्टॉल से कुछ ही दूर खड़े एक शख्स ने बैग से बोतल निकाल कर ढक्कन खोला और पानी की घूंट भरने लगा. बर्लिन के नल का पानी साफ और सुरक्षित है जानते हुए भी वह उसे नहीं पीते क्योंकि उन्हें बोरिंग लगता है. इस शख्स ने कहा, "मैं सचमुच केवल बुलबुले वाला पानी पसंद करता हूं, यह मेरी समस्या है, इसलिए मैं नल के पानी से बचता हूं." अब चाहे इसके लिए अलग से पैसे ही क्यों न देने पड़ें.

पानी बेचने वाली कंपनी बुलबुले के इन दीवानों का तो ख्याल रखती ही है साथ में बिना गैस वाला सादा पानी भी बोतलों में बंद कर बेचती हैं. पिकनिक मनाने आई क्लाउडिया फॉन एक कप से पानी पीते हुए बहुत संतुष्ट नहीं दिखाई देतीं. उनका परिवार बोतलबंद पानी पर चलता है और परिवार की प्यास बुझे इसका ख्याल उन्हें ही रखना पड़ता है. वो कहती हैं, "पूरे परिवार के लिए पीने का बंदोबस्त करने में काम बहुत बढ़ जाता है." फॉन बताती हैं कि तीन दिन बाद उनके बच्चे कहते हैं, "ओह इतनी सारी खाली बोतल" और मैं कहती हूं, "हां"

Berliner Wasserfest

बर्लिन का वासरफेस्ट

फॉन प्लास्टिक की बोतलों का दोबारा इस्तेमाल करती हैं, कांच की बोतलें काफी भारी हो सकती हैं. वो और जोर दे कर कहती हैं कि वो पर्यावरण की मदद कर रही हैं उसे नुकसान नहीं पहुंचा रहीं. बोतलबंद पानी घर में रखने की एक वजह मेहमान भी हैं. फॉन के मुताबिक घर आए किसी प्यासे मजदूर को भी वो नल का पानी पीने के लिए नहीं दे सकतीं. इसे अपमानजनक रूप से कठोर माना जाएगा. हंसते हुए फॉन ने कहा, "मेरा मतलब है कि नल से भर किसी को पानी देना एक तरह से जानवरों को चारा देने जैसा है. वो दोबारा कभी नहीं आएगा." फॉन को अपनी बेटी के लिए भी बोतल की जरूरत होती है जो वह स्कूल ले जा सके वहां प्याऊ जैसी कोई चीज नहीं होती. वास्तव में जर्मनी में आपको कहीं भी प्याउ नजर नहीं आएगा, न ट्रेन स्टेशन पर, न एयरपोर्ट पर और न ही कहीं और.

नल की छवि बदलनी होगी

फेडर्न का मानना है कि नल के पानी की छवि बदलने की जरूरत है. फेडर्न ने कहा, "पानी बेचने वाले कभी भी अपनी तकनीक के बारे में नहीं बात करते. वो हमेशा अच्छी बोतल, हमारे रवैये, कैसे पानी का इस्तेमाल अच्छा महसूस करने के लिए किया जा सकता है इन्हीं की चर्चा करते हैं. हमें भी उनसे थोड़ा सीख कर इस दिशा में बढ़ना होगा."

फेडर्न की कंपनी फिलहाल कुछ हद तक निजी हाथों में है लेकिन जल्दी ही यह पूरी तरह से सरकारी होगी. जर्मन संसद ने यूरोपीय संघ के पानी को निजी हाथों में सौपने के फैसले के खिलाफ वोट दिया है. उनका मानना है कि लोग इस्तेमाल करें या नहीं पानी लोगों का ही रहना चाहिए.

रिपोर्टः फ्रांसिस्का बाडेनशायर/एनआर

संपादनः ओंकार सिंह जनौटी

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