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जर्मन चुनाव

बॉलीवुड पर चुनावी रंग

भारत में आम चुनाव पास आने के साथ ही बॉलीवुड भी इसमें रंग गया है. कई फिल्में राजनीति का पुट लेते हुए आ रही हैं, जिनमें सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं. इसमें भ्रष्ट नेताओं का मजाक उड़ाया गया है.

एक बकरी, एक भूत और एक विवादित लाश पर आधारित तीन फिल्में रिलीज हो रही हैं, जो लोगों को राजनीतिक कहानी से दो चार कराएंगी. हालांकि किसी भी फिल्म में किसी नेता को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया है.

पारिवारिक फिल्म "भूतनाथ रिटर्न्स" में अमिताभ बच्चन एक दोस्ताना भूत का किरदार निभाया है, जो स्थानीय चुनाव के वक्त भ्रष्ट नेताओं पर हमला करता है. बच्चन का कहना है कि कॉमेडी हॉरर फिल्म "अपनी कहानी से वोटरों को एक गंभीर संदेश" देता है.

कभी खुद भी राजनीति से जुड़े अमिताभ बच्चन का कहना है, "एक वोट हमारे देश में महान बदलाव ला सकता है और मैं समझता हूं कि युवाओं को बड़ी संख्या में हमारे चुनावों में हिस्सा लेना चाहिए." निर्देशक नितेश तिवारी का कहना है कि यह फिल्म "बलिदान, हौसला और देशभक्ति" पर आधारित है.

अगले ही हफ्ते "यह है बकरापुर" नाम की फिल्म रिलीज हो रही है. यह ग्रामीण भारत के जटिल प्रशासनिक तंत्र को सामने लाती है. कहानी एक बकरी की है, जो अपने इलाके में काफी लोकप्रिय है. निर्देशक जानकी विश्वनाथन का कहना है कि उन्होंने जान बूझ कर तय किया कि वह अपनी फिल्म भारतीय चुनाव के बीच में ही रिलीज करेंगी, "मैं समझती हूं कि हम अपनी जिंदगी में जो भी फैसला करते हैं, उसका एक राजनीतिक कोण होता है. सिर्फ सरकार और मंत्रियों के लिहाज से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन के लिहाज से भी."

Szene aus dem Film Peepli Live

पीपली लाइव भी राजनीति से प्रेरित

"देख तमाशा देख" नाम की फिल्म 18 अप्रैल को रिलीज हो रही है. यह एक सच्ची कहानी पर आधारित है, जिसे फिरोज अब्बास खान ने निर्देशित किया है. फिल्म में एक गरीब आदमी एक नेता के विशाल पोस्टर के नीचे कुचला जाता है. इसके बाद हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग इस शव पर कब्जा जमाते हैं.

खान का कहना है, "फिल्म ऐसे वक्त रिलीज हो रही है, जब लोग अपने लिए एक बेहद अहम फैसला ले रहे होते हैं कि उन्हें किसे वोट देना है." भारत में नौ चरणों के मतदान के बाद 16 मई को नतीजों का एलान होगा.

इससे पहले 28 मार्च को भारत में यंगिस्तान नाम की फिल्म रिलीज हुई, जिसमें एक युवा प्रधानमंत्री की कहानी है, जो अपनी निजी और सार्वजनिक जीवन में संतुलन लाने की कोशिश कर रहा है और वह भी ऐसे समय में, जब उसके पिता की हत्या की जा चुकी है. कई लोगों का कहना है कि यह फिल्म राहुल गांधी के आस पास घूमती है.

बॉलीवुड ने इससे पहले आंधी (1975) भी बनाई है, जो कथित तौर पर इंदिरा गांधी पर आधारित थी. इंदिरा गांधी ने फिल्म पर पाबंदी लगा दी थी और फिल्म तभी रिलीज हो पाई, जब दो साल बाद वह चुनाव हार गईं. इसके अलावा 1983 की सुपरहिट फिल्म "जाने भी दो यारों" में भी राजनीति का मुद्दा उठाया गया था, जबकि 2010 में आमिर खान की "पीपली लाइव" भी सियासत से जुड़ी थी.

एजेए/एएम (एएफपी)

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