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मनोरंजन

बॉलीवुड को दर्द दे गया 2012

हिन्दी सिनेमा उद्योग के लिए 2012 किसी अमावस्या की तरह साबित हुआ, जिसने चुन चुन कर सितारे तोड़ लिए. बड़े अदाकारों और निर्देशक से लेकर संगीत तक की बड़ी शख्सियतों ने इस साल दुनिया से विदा ले लिया.

राजेश खन्ना, दारा सिंह, यश चोपड़ा और सितार वादक पंडित रविशंकर सब 2012 में ही गुजरे.

दिसंबर में पंडित रविशंकर का कैलिफोर्निया के एक अस्पताल में दिल का ऑपरेशन हुआ. इसके बाद वह सेहतमंद नहीं हो पाए और 92 साल की उम्र में चल बसे. उन्हें 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है. ग्रैमी पुरस्कार विजेता रविशंकर को भारतीय संगीत को विश्व पटल पर लाने के लिए जाना जाता है.

बॉलीवुड के लिए यश चोपड़ा की मौत भी किसी सदमे से कम साबित नहीं हुई. शाहरुख खान और कैटरीना कैफ को लेकर उन्होंने जब तक है जान का निर्माण पूरा किया था और वह जीवन से भरे नजर आ रहे थे. लेकिन इसके बाद छोटी सी बीमारी के साथ उनका निधन हो गया. कुछ हफ्ते पहले ही 80 साल के होने पर चोपड़ा ने संन्यास की घोषणा की थी. वह अपने परिवार के साथ वक्त बिताना चाहते थे लेकिन डेंगू की गिरफ्त में पड़ने के बाद वह निकल नहीं पाए.

त्रिशूल, दीवार, सिलसिला, लम्हे, चांदनी और दिल तो पागल है जैसी फिल्में बनाने वाले चोपड़ा की आखिरी फिल्म जब तक है जान उनकी मौत के बाद रिलीज हुई.

भारतीय सिनेमा को इसी साल सदाबहार रोमांटिक हीरो राजेश खन्ना की विदाई भी झेलनी पड़ी. हिन्दी फिल्मों के पहले सुपर स्टार समझे जाने वाले खन्ना ने जुलाई में दुनिया को अलविदा कह दिया. 69 साल के राजेश खन्ना को आखिरी विदाई देने उनके प्रशंसक भारी संख्या में जमा हुए. दो रास्ते, आराधना, आनंद और अमर प्रेम जैसी फिल्मों का हीरो अचानक चल बसा.

हिन्दी फिल्मों की दादी मां और ओ मेरी जोहरा जबीं गीत से लोकप्रिय हुईं अचला सचदेव का भी 91 साल की उम्र में निधन हुआ. वक्त और दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे में उन्होंने शानदार चरित्र भूमिका निभाई थी.

पहलवान और रामायण के हनुमान दारा सिंह भी 84 साल की दुनिया में विदा हो गए. अखाड़े में मुश्किल से मुश्किल बाजी जीतने वाले सिंह ने हिन्दी फिल्मों में भी शानदार कामयाबी हासिल की. उन्होंने छोटे और बड़े पर्दे पर भी लाजवाब भूमिकाएं निभाईं.

हिन्दी फिल्मों के चाचा, ताऊ, दादा और अनगिनत मौकों पर रामू काका की भूमिका निभाने वाले एके हंगल ने भी 98 साल की उम्र में दम तोड़ दिया. शोले, शौकीन, नमक हराम और आईना जैसी फिल्मों में यादगार भूमिका निभाने वाले हंगल की किडनी ने काम करना बंद कर दिया.

शागिर्द और एक मुसाफिर, एक हसीना फिल्मों के हीरो जॉय मुखर्जी भी इसी साल 73 साल की उम्र में सांस लेने की तकलीफ के बाद चल बसे. निर्देशक बीआर इशारा, सिनेमाटोग्राफर अशोक मेहता और मलयालम फिल्मों के हीरो थिलाकन भी इसी साल गुजरे.

इन सबके बीच फिल्म और मीडिया जगत का एक बड़ा नाम जसपाल भट्टी कार हादसे का शिकार हो गया. 57 साल के भट्टी अपने बेटे के साथ जालंधर से बठिंडा जा रहे थे, तभी उनकी कार हादसे का शिकार हो गई.

फ्लॉप शो और उल्टा पुल्टा जैसे कार्यक्रमों से दूरदर्शन पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले भट्टी ने आम लोगों के दिल में भी जगह बना ली थी.

एजेए/एनआर (पीटीआई)

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