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दुनिया

बॉलीवुड: उड़ान पर महिलाएं, लेकिन आमदनी कहां?

बॉलीवुड में यह साल महिलाओं का है. कुछ बड़ी हिट फिल्मों में महिलाओं ने प्रमुख किरदार निभाया है या फिर कहानी उन्हीं के इर्द गिर्द गढ़ी गई.

2014 की गर्मियों में कंगना राणावत की फिल्म क्वीन रिलीज हुई. फिल्म की कहानी ऐसी लड़की पर है जो अकेले ही हनीमून पर चली जाती है. फिल्म हिट हुई. एक और फिल्म महिला बॉक्सर मैरी कॉम पर बनी. पर्दे पर इसने भी धमाल मचाया. फिल्म मैरी कॉम में प्रियंका चोपड़ा ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली बॉक्सर का किरदार निभाया है. पहले बॉलीवुड में चलन हुआ करता था कि महिलाएं मुख्य हीरो की प्रेमिका, बहन या फिर मां का किरदार निभाती थीं, जो भारतीय समाज में पुरुषों के पारंपरिक प्रभुत्व को दर्शाता है. लेकिन बॉक्स ऑफिस में सफलता और नई शौहरत मिलने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्रियां अब पूछ रही हैं कि पैसे कहां है?

बराबरी का हक मांगती अभिनेत्रियां

बॉलीवुड के जानकारों का कहना है कि टॉप अभिनेता जैसे कि बॉलीवुड के तीन खान-सलमान, शाहरूख और आमिर और एक्शन स्टार अक्षय कुमार करीब 40 करोड़ रुपये औसतन हर एक फिल्म के जरिए कमाते हैं साथ ही वे मुनाफे का हिस्सा भी अलग से लेते हैं. ए श्रेणी में आने वाली अभिनेत्री जैसे दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ को फीस के तौर पर प्रति फिल्म का दसवां हिस्सा मिलता है. हाल ही में दीपिका पादुकोण ने एक फिल्म साइन की है जिसकी फीस करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इस सौदे ने बॉलीवुड में सनसनी फैला दी, क्योंकि इसी के साथ दीपिका पादुकोण सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री बन गई. अभिनेत्रियां अब भारी असमानता के खिलाफ खुलकर बात करने लगी हैं. अभिनेत्री अदिति राव हैदरी कहती हैं, "मुझे समझ नहीं आता कि पुरुष अभिनेताओं से हमें क्यों कम पैसे दिए जाते हैं क्योंकि हम भी उतनी ही मेहनत करते हैं. हाल के वक्त में अभिनेत्रियों ने दिखाया है कि वे भी हिट फिल्म दे सकती हैं. हम भी बेहतर भुगतान के योग्य हैं, अभिनेताओं को मिलने वाले भुगतान के बराबर."

बराबरी की मांग

मांग पिछले साल तेज हुई जब महिलाओं को कई हिट फिल्मों में प्रमुखता से जगह दी गई. इस दबाव के बाद निर्माता और निर्देशकों को अभिनेत्रियों के अभिनय के लिए नए सिरे से सोचना शुरू करना पड़ा.

पिछले कुछ सालों के दौरान ऐसी कई फिल्में बनी हैं जिनमें कैटरीना, दीपिका और राणावत के साथ प्रियंका और विद्या बालन ने काम किया है और ये सभी फिल्में कमाई के मामले में एक अरब रुपये का आंकड़ा पार चुकी हैं. कमाई के मामले में इतनी रकम किसी भी फिल्म को हिट बनाने के लिए काफी हैं. परिवर्तन का हिस्सा भारतीय महिलाओं की अधिक से अधिक खर्च करने की ताकत को दिखाता है. महिलाएं आज दफ्तरों में काम कर रही हैं, अधिक पैसे कमा रही हैं और वे चाहती हैं कि वे ऐसी फिल्में देखें जिसमें अभिनय महिलाएं कर रही हैं और उस कहानी से अपने आपको जोड़ कर सकें. वे ऐसी फिल्मी नहीं पसंद करती जहां महिलाएं सिर्फ इसलिए होती हैं कि थिएटर तक पुरुषों को खींचा जा सके.

जबकि जिन फिल्मों में महिलाओं का मुख्य किरदार है और वे बॉक्स ऑफिस पर बहुत बेहतर कर रही हैं,

बॉलीवुड में हर साल एक हजार फिल्में बनती हैं. पिछले एक दशक में आय 10 फीसदी तक बढ़ी है. साल 2012 में आय 3.5 अरब डॉलर थी. उसी साल हॉलीवुड की आय 10.8 अरब डॉलर थी. अभिनेत्री कंगना राणावत कहती हैं, "दर्शकों के बदलाव के कारण यहां से सबकुछ और बेहतर होगा. हम ऐसे समाज की तरफ बढ़ रहे हैं जहां अधिक पढ़ी लिखी और कामकाजी महिलाएं हैं. वे पर्दे पर शक्तिशाली महिलाओं को देखना चाहती हैं."

फिल्म विश्लेषक तरण आदर्श कहते हैं क्योंकि भारतीय पुरुष अभिनेताओं को बेहतर भुगतान होता है और वे ज्यादा प्रतिष्ठित हैं, इसलिए वे ज्यादा जोखिम भी उठाते है.

तेजी के साथ वे फिल्म के मुनाफे का हिस्सा और वितरण अधिकार की मांग भी कर रहे हैं, जबकि महिला कलाकार अब भी एक बार भुगतान का सुरक्षित विकल्प अपना रही हैं. आदर्श कहते हैं, "अभिनेत्रियां हो सकता है कि ऐसा सोच सकती हैं कि अगर फिल्म बॉक्स ऑफिस में हिट नहीं हुई तो हो सकता है कि उन्हें मार्केट रेट भी ना मिले. आदर्श को लगता है कि बेहतर मेहनताने के लिये अभिनेत्रियों की मांग जायज है. लेकिन कुछ और भी बातें हैं जो करार के वक्त अहम होती हैं और वे हैं लोकप्रियता और ट्रैक रिकॉर्ड. प्रियंका चोपड़ा कहती हैं कि अगर महिलाओं पर बनी फिल्में लोकप्रिय होने लगें तो भारत में आय का अंतर भी कम हो जाएगा.

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