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दुनिया

बेलआउट पर जर्मनी ने ग्रीस पर दबाव बढ़ाया

ग्रीस के दिवालियेपन के गहराते संकट के बीच जर्मन चांसलर ने ग्रीस को मदद देने की प्रतिबद्धता जताई है, साथ ही ग्रीस की सरकार से सुधारों पर अमल की मांग की है. यूरो देशों को ग्रीस से प्रस्तावित सुधारों की लिस्ट का इंतजार है.

गुरुवार की शाम लक्जेमबर्ग में होने वाली यूरोजोन के 19 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले जर्मन संसद को संबोधित करते हुए चांसलर मैर्केल ने ग्रीस के साथ काफी लंबी खिंच चुकी बातचीत को जल्दी अंजाम तक पहुंचाने की बात की. वित्त मंत्रियों की बैठक से भी किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने की कम ही उम्मीद जताई जा रही है.

ग्रीस के प्रधानमंत्री अलेक्सिस सिप्रास रूस जाकर राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से मिलने वाले हैं. इस मुलाकात से अटकलें लगाई जा रही हैं कि ग्रीस अब रूस से नया कर्ज लेने की कोशिश कर रहा है. इस बाबत पूछे जाने पर रूसी उप-प्रधानमंत्री अर्काडी द्वोर्कोविच ने कहा कि वह "किसी विशेष निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते."

30 जून को बेलआउट प्रोग्राम के खत्म होने से पहले-पहले ग्रीस को अपने कर्जदाताओं से और कर्ज का इंतजाम करना है. इस समय सीमा के बाद ग्रीस को अंततरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए कर्ज में से 1.6 अरब यूरो चुकाने हैं. मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीने लागार्द ने कहा है कि ग्रीस को और कोई मोहलत नहीं मिलेगी. किसी तरह के समझौते पर ना पहुंचने के लिए अब तक ग्रीस और उसके कर्जदाता सार्वजनिक रूप से एक दूसरे को ही जिम्मेदार ठहराते आए हैं.

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे ज्यादा राहत ऋण देने वाला देश जर्मनी फरवरी में ही ग्रीस सरकार से साफ कर चुका है कि वह "बड़े स्तर पर बुनियादी संरचनाओं में सुधार लाने की ओर बढ़े." मैर्केल ने जोर देकर कहा, "जर्मनी की सारी कोशिशें ग्रीस को यूरोजोन में बनाए रखने की ओर हैं."

चांसलर मैर्केल ने दोहराया कि "जहां चाह हो, वहां राह होती है - अगर ग्रीस के राजनीतिक नेता अपनी इच्छाशक्ति दिखाते हैं तो किसी समझौते पर पहुंचना संभव है." पहले बेलआउट किए जा चुके देशों पुर्तगाल, आयरलैंड और साइप्रस की बात करते हुए मैर्केल ने बताया कि इन देशों को भी कई मुश्किल बदलाव लाने पड़े और "उन्होंने इस अवसर का फायदा उठाया". जिसकी तर्ज पर ग्रीस को भी उन्हें मिलने वाली मदद के बदले सुधारवादी कदम उठाने चाहिए.

आरआर/एमजे (एपी)

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