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मनोरंजन

बेदाग हीरे से दुनिया अवाक

रंगहीन, एक दम बेदाग, दुनिया का सबसे बड़ा हीरा भारत में गोलकुंडा की खान से निकल रत्नों के बाजार पहुंचा तो सबसे मंहगा हीरा भी बन गया. जिनेवा में यह हीरा सारे रिकॉर्ड तोड़ 1.18 अरब रुपये में बिका.

नीलामी के बाद इंटरनेशनल ज्वेलरी डिपार्टमेंट के निदेशक फ्रांकोइस कुरियल ने कहा, "गोलकुंडा के हीरे का यह विश्व रिकॉर्ड है और रंगहीन हीरे के लिए प्रति कैरेट के हिसाब से लगाया यह रिकॉर्ड दाम है." एक बड़ी लीची के बराबर आकार वाला यह हीरा 76.02 कैरेट वजनी है. 18वीं और 19वीं शताब्दी में यह हीरा ऑस्ट्रिया की एक रियासत के शाही परिवार के पास था. वहीं से इसका नाम आर्क ड्यूक जोसेफ डायमंड पड़ा.

नीलामी से पहले इसकी कीमत 1.5 से 2.5 करोड़ स्विस फ्रांक आंकी गई थी. आर्क ड्यूक जोसेफ डायमंड को खरीदने वाले ने इसके लिए 2.03 करोड़ स्विस फ्रांक की कीमत लगाई, यानी करीब 1.18 अरब रुपये. नीलामी करने वालों को उम्मीद नहीं थी कि हीरा ऐसी चमक बिखेरेगा. कुरियल के मुताबिक, "फिलहाल बाजार बहुत अच्छा नहीं है लेकिन इसके बावजूद आज रात हुई बिक्री ने हमें अचंभित कर दिया है."

Erzherzog Joseph Diamant in Genf versteigert

यही है आर्चड्यूक जोसेफ हीरा

हीरे की नीलामी भी फिल्मी अंदाज में हुई. कई बोलीदार सामने सामने बोली लगा रहे थे, लेकिन असल खरीदार ने फोन के जरिए बोली लगाई और हीरा ले गया. ग्राहक का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है. हीरा अमेरिका की जवाहरात कंपनी ब्लैक, स्टार एंड फ्रॉस्ट ने बेचा. माना जा रहा है कि हीरा किसी म्यूजियम का हिस्सा बनेगा.

इससे पहले सबसे ज्यादा महंगे रंगहीन हीरे का रिकॉर्ड मोती के आकार वाले 'बेऔ सैंसी' के नाम था. पिछले साल मई में 'बेऔ सैंसी' 90 लाख स्विस फ्रांक में बिका.

गोलकुंडा के हीरे
18वीं शताब्दी से पहले गोलकुंडा की खानों से निकाले गए हीरे ऐतिहासिक हैं. गोलकुंडा की खानों से ही दुनिया का सबसे मशहूर हीरा कोहिनूर भी निकला. कोहिनूर फिलहाल ब्रिटेन के राजपरिवार के मुकुट में लगा हीरा है.

आर्क ड्यूक जोसेफ हीरा को भी कोहिनूर के समकक्ष माना जाता है. अमेरिका और स्विट्जरलैंड की क्रिस्टीज ज्वेलरी के प्रमुख राहुल कदाकिया के मुताबिक, "आर्चड्यूक जोसेफ हीरा नीलामी में आने वाला गोलकुंडा की खदानों का बेहतरीन और सबसे बड़ा हीरा है. अपने इतिहास और बेहतरीन क्वालिटी की वजह से यह महान कोहिनूर से तुलना करने योग्य है."

1936 में इस हीरे को आर्चड्यूक ने एक बैंक में जमा कराया. तीन साल बाद इसे यूरोप के एक अन्य बैंक ने खरीदा और फ्रांस में रखा. नीलामी घर के मुताबिक, "फ्रांस में हीरे को ऐसी जगह रखा गया था जिसे द्वितीय विश्वयुद्ध में भी कोई नहीं खोज सका."

लंबे इंतजार के बाद 1961 में यह सामने आया. फिर 1993 में फिर नीलामी के मेज पर पेश हुआ. 19 साल पहले क्रिस्टीज ने 97 लाख स्विस फ्रांक में इसे खरीदा. नीलामीघर के मुताबिक वित्त बाजार की बुरी हालत देखते हुए कई रईस इस वक्त गहनों, रत्नों और पेटिंगों पर भारी निवेश कर रहे हैं.

ओएसजे/एनआर (पीटीआई, रॉयटर्स)

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