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जर्मन चुनाव

बेटे को बचाने की बिनायक की मां की अपील

देशद्रोह की सजा झेल रहे सामाजिक कार्यकर्ता बिनायक सेन की 84 साल की बूढ़ी मां अपने बेटे को बचाने आगे आई हैं. बिनायक की मां हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली हैं और उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगी.

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बिनायक को उम्रकैद मिली है

पश्चिम बंगाल के कल्याणी जिले में रहने वाली बिनायक की 84 साल की मां अनुसूया सेन ने कहा कि वह अगले महीने के शुरू में हाई कोर्ट में केस दायर करेंगी और बिनायक की जमानत की अपील की जाएगी. उनकी मां को उम्मीद है कि बिनायक छूट जाएंगे. छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने बिनायक सेन को उम्र कैद की सजा सुनाई है.

अनुसूया सेन ने कहा, "अगर जरूरत पड़ी तो मैं सुप्रीम कोर्ट भी जाऊंगी, ताकि मेरा बेटा आजाद हो सके. मेरा बेटा निर्दोष है और वह छत्तीसगढ़ में गरीब लोगों की मदद के लिए काम कर रहा है. इस काम के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाला जोनाथन मन पुरस्कार भी मिल चुका है."

उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र भी लिखने के लिए तैयार हैं. बिनायक पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे वक्त से छत्तीसगढ़ में काम कर रहे हैं. उन्हें 2007 में भारत के खिलाफ युद्ध भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बुद्धिजीवी वर्ग भी बिनायक सेन को मिली सजा के खिलाफ आवाज उठा रहा है. अमेरिका में जाने माने बुद्धिजीवी नोआम चोम्स्की ने दर्जनों लोगों के साथ मिल कर इस मामले में कोर्ट के फैसले के खिलाफ चिट्ठी लिखी है.

खत में कहा गया है, "हम इस बात को जान कर बेहद स्तब्ध हैं कि छत्तीसगढ़ की अदालत ने बिनायक सेन को देशद्रोह का दोषी पाया है और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई है." चिट्ठी में कहा गया है कि सेन को अविश्वसनीय सजा दी गई है. अमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी बिनायक सेन को सजा दिए जाने का विरोध किया है और कहा है कि कानून की खामियों को इस्तेमाल किया गया.

सेन पर छत्तीसगढ़ में माओवादियों को मदद पहुंचाने का आरोप है और सरकारी वकीलों का कहना है कि उन्होंने माओवादी नेटवर्क को मजबूत करने में मदद की है. हालांकि सेन हमेशा खुद को बेकसूर बताते रहे हैं. उन्होंने एक ताजा बयान जारी कर कहा है कि उनके खिलाफ सबूत गलत तरीके से जुटाए गए.

सेन ने तहलका पत्रिका के माध्यम से जारी अपने बयान में कहा, "छत्तीसगढ़ सरकार मुझे मिसाल बना कर पेश करना चाहती है कि कोई दूसरा व्यक्ति राज्य में मानवाधिकार की बात न करे." गिरफ्तार किए जाने से पहले वह छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य क्लिनिक चला रहे थे और गरीबों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने वाली ट्रेनिंग दे रहे थे. उन्हें रिहा करने के लिए इंटरनेट पर फेसबुक और ट्विटर के जरिए बड़ा अभियान शुरू हो चुका है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः ए कुमार

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