बेटे के लिए मां की जान जोखिम में | दुनिया | DW | 26.07.2014
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दुनिया

बेटे के लिए मां की जान जोखिम में

शादी के एक महीने बाद ही पति ने मा शुयुन पर हाथ उठाना शुरू कर दिया. पति से थप्पड़ और ठोकरें खाना आम सी बात हो गयी. दो साल यही सिलसिला चलता रहा. इस बीच एक बेटी हुई. तो मार पीट सिर्फ पत्नी ही नहीं बच्ची के साथ भी शुरू हो गई.

कारण सिर्फ इतना ही कि चीन में मा शुयुन के पति को लड़की नहीं लड़का चाहिए था. घबराई मा ने पुलिस की मदद मांगी. इसके बाद पति ने अपनी मां की मदद से पत्नी को रजाई में लपेट कर उसका दम घोंटने की कोशिश की. पुलिस ने मा के पति को नहीं बल्कि उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया क्योंकि वह अपनी बहन को बचाने की कोशिश कर रहा था और उस पर हमला करने वाले से भिड़ गया था. मा के मुताबिक, "उन्होंने मेरे पति को नहीं पकड़ा क्योंकि उन्हें लगा मेरी चोट इतनी गंभीर नहीं है. उन्होंने सोचा कि ये छोटा सा वैवाहिक मतभेद है."

इतना ही नहीं मा के पति ने अब तलाक के लिए अर्जी दी है. बच्ची को अपने पास रखने और बच्ची की देखरेख के लिए मासिक डेढ़ हजार युआन (करीब 15,000 रुपये) की मांग की है. अदालत ने मा की अपील सबूतों की कमी के कारण खारिज कर दी. और उनका भाई आठ महीने से जेल में बंद है.

मा की मदद करने वाली महिला अधिकार कार्यकर्ता होऊ झिमिंग का कहना है कि चीन में ऐसी रिपोर्टें सामान्य हैं. अनुमान है कि चीन के एक चौथाई परिवारों में घरेलू हिंसा होती है. अधिकारी इसमें बीचबचाव नहीं करते क्योंकि वह इसे निजी मामला समझते हैं. दो दशक पहले बीजिंग ने एक अहम वैश्विक कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी जिसमें दुनिया भर में महिला अधिकारों को आगे बढ़ाने की बात की गई थी.

लेकिन चीन में खुद ही कोई घरेलू हिंसा का कानून नहीं है. और घरेलू हिंसा से निपटने वाली देश की इकलौती संस्था ने अपने विलय की घोषणा कर दी है. होऊ ने कहा, "इसका हानिकारक असर होगा. क्योंकि जब घरेलू हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय एजेंसी की बात हो रही हो, जितनी ताकत हमारे पास होगी उतना अच्छा होगा.

करीब दो दशक पहले तक चीन में मार पीट को तलाक के कारण के तौर पर भी स्वीकार नहीं किया जाता था. 2001 में शादी के कानून में पहली बार बदलाव किया गया ताकि घरेलू हिंसा पर रोक लगाई जा सके. सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी ऑल चाइना विमेन्स फेडरेशन के मुताबिक चीन में अभी भी 27.7 फीसदी घरों में हिंसा होती है.

कई मामले

चीन में घरेलू हिंसा पर बोलना वर्जित है लेकिन हाल के सालों में हुए हाई प्रोफाइल मामलों ने इस समस्या को एक बार फिर सामने लाया. 2011 में अमेरिकी किम ली ने अपने चित्र ऑनलाइन पोस्ट करके हड़कंप मचा दिया दिया. इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता था कि उनके पति ली यांग ने उनके साथ कितनी मार पीट की थी. ली यांग चीन का जाना माना नाम है और क्रेजी इंग्लिश लैंग्वैज स्कूल के संस्थापक थे. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ली को पिछले साल तलाक मिल गया. जून में चीन के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी महिला ली यान की मौत की सजा भी खारिज कर दी जिसने मार पीट करने वाले अपने पति की हत्या कर दी.

एएम/एजेए (एएफपी)

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