बेटी गिराने के लिए क्या क्या नहीं करेंगे लोग! | ब्लॉग | DW | 07.07.2016
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ब्लॉग

बेटी गिराने के लिए क्या क्या नहीं करेंगे लोग!

सुप्रीम कोर्ट ने याहू, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट से जवाब मांगा है कि उनके सर्वर पर भ्रूण के लिंग का पता करने वाले विज्ञापन क्यों चल रहे हैं. सवाल यह भी उठता है कि विज्ञापन बनाने वाले कौन हैं.

इंटरनेट स्मार्ट होता जा रहा है. आपके फोन को, आपके टैबलेट को और आपके लैपटॉप को पता है कि आपको क्या चाहिए. एक बार किसी घड़ी का डिजाइन देखने के लिए गूगल में सर्च कीजिए, उसके बाद सेल्स्मेन की तरह हर वेबसाइट आपको वही घड़ी बेचने लगेगी. यहां तक कि आप फेसबुक भी खोलेंगे, तो भी उस घड़ी का विज्ञापन आपको दिख ही जाएगा.

Bhatia Isha

ईशा भाटिया

कपड़े, गहने, जूते, यहां तक तो ठीक है, लेकिन अगर आपके ब्राउजर में चल रहा विज्ञापन आपको अपने होने वाले बच्चे के लिंग के बारे में जानकारी देना चाह रहा है, तब कहीं कुछ गड़बड़ है. विज्ञापन यूं ही तो नहीं आ गया, जरूर आपने कुछ सर्च किया. और अगर किया तो क्यों? क्यों जरूरत पड़ी यह जानने की कि कोख में लड़का पल रहा है या फिर लड़की? गली वाली डॉक्टर साहिबा ने बताने से इनकार कर दिया था, इसलिए इंटरनेट में ढूंढने निकले थे?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में याहू, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट को लताड़ा है. क्योंकि जब देश में कानून है कि भ्रूण के लिंग का पता नहीं किया जा सकता, तो फिर इनके सर्च इंजन पर इस तरह के विज्ञापन क्यों और कैसे चल रहे हैं. इन कंपनियों को अब सरकार के साथ बैठक करनी है और सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करना है कि किस तरह से इन विज्ञापनों को ब्लॉक किया जाएगा.

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लेकिन जब तकनीकी पहलुओं पर बात हो ही रही है, तो क्या साथ ही इसका भी पता लगाना जरूरी नहीं बन जाता कि ये कौन लोग हैं, जो इंटरनेट पर इस तरह के विज्ञापन देने की हिम्मत रखते हैं. कभी सड़क किनारे चिपके पैम्फ्लेट जो काम करते थे, वही आज इंटरनेट में फैले ये विज्ञापन कर रहे हैं. और अगर इनके पास ऐसी तकनीक भी मौजूद है कि ये भ्रूण के लिंग का पता कर सकें, तो या तो ये लोग डॉक्टर हैं या फिर इन्होंने गैरकानूनी तरीके से मशीनें हासिल की हैं.

सरकार की जिम्मेदारी बनती है, इन लोगों तक पहुंचने की. गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी बड़ी कंपनियों पर जुर्माना ठोक देना बहुत आसान है. और इनके लिए कुछ एक करोड़ दे देना भी कोई बड़ी बात नहीं है. समस्या की जड़ तक पहुंचने की जगह सरसरी तौर पर इसे निपटा देना समाधान नहीं है. उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है जिनके इरादे गलत हैं.

और रही बात बच्चे के लिंग का पता करने की. तो इसमें कोई बुराई नहीं है. मां बाप का हक बनता है कि उन्हें पता हो कि बेटा होने वाला है या बेटी. इस तरह से वो खुद को बेहतर रूप से तैयार भी कर सकते हैं. लेकिन लिंग पता करने का मकसद अगर बच्चा गिराना है, लड़की के दुनिया में आने के हक को छीनना है, तब आपके हकों की बात करना फिजूल है.

ब्लॉग: ईशा भाटिया

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