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मनोरंजन

बेटी को तोहफे में दिया टापू

आम तौर पर बच्चों को बहलाने के लिए खिलौने वाले राजकुमार और लकड़ी के छोटे महल खरीद दिए जाते हैं. लेकिन अमेरिका में जब एक सात साल की बेटी ने राजकुमारी बनने की जिद की, तो बाप ने उसे एक साम्राज्य ही खोज निकाला.

सात साल की एमिली हीटन की सालगिरह नजदीक आ रही थी और उसे राजकुमारी बनने का शौक था. पिता जेरेमिया सोच रहे थे कि उसका यह शौक कैसे पूरा किया जाए. आखिरकार उन्होंने बेटी के लिए सत्ता खोज ही निकाली. 16 जून को मिस्र और सूडान के बीच के एक टापू पर उन्होंने अपना झंडा गाड़ दिया. इसके साथ ही उत्तरी सूडान नाम का साम्राज्य पैदा हो गया.

अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के एक दूर दराज इलाके में रहने वाले हीटन ने इस रोमांचकारी अनुभव के बारे में बताया, "आप किसी बच्चे को यह तो नहीं कह सकते कि वह जो चाहता है, उसे नहीं मिलेगा. और छह साल की उम्र में ही वह खुद को राजकुमारी समझने लगी थी. तो मैंने कहा कि वह राजकुमारी बन सकती है."
इसके बाद उन्होंने ऐसी जगहों की तलाश शुरू की, जिस पर किसी का मालिकाना हक न हो. शुरू में तो यह बेकार लगा, "मैंने पहले अंटार्कटिक इलाके में ऐसी किसी जगह की खोज शुरू की लेकिन अंटार्कटिक समझौते की वजह से वहां जमीन की खरीद बिक्री नहीं होती है."

लेकिन गूगल की कृपा से वह आखिरकार बीर तावील द्वीप तक पहुंच गए, जो मिस्र और सूडान के बीच है और जहां कोई आबादी नहीं है. सीमा विवाद की वजह से इस पर कोई ध्यान नहीं देता है. इसके बाद हीटन ने अफ्रीका की फ्लाइट पकड़ने में वक्त नहीं लिया.

Freizeit- und Erlebnisbäder in Deutschland (Bildergalerie)

द्वीप पर गाड़ा झंडा

उनका कहना है, "मैंने पिरामिड नहीं देखा, मैंने कोई ऐशो आराम नहीं भोगे. मैं सिकंदरिया भी नहीं गया. मेरा मकसद ही था कि मैं सीमा पर जाऊं और बीर तावील द्वीप तक पहुंचूं. मैं शायद उन गिने चुने लोगों में हूं, जिन्होंने मिस्र जाकर भी पिरामिड नहीं देखे." हीटन ने बताया कि पूरे काम में सिर्फ 3000 डॉलर लगे और अब एमिली अपनी सत्ता को लेकर बड़े ख्वाब देख रही है. सात साल की लड़की कहती है, "हम अफ्रीका में उन बच्चों को मदद करना चाहते हैं, जिनके पास खाना नहीं है. हम उतना ही बड़ा बगीचा बनाना चाहते हैं, जितनी बड़ी हमारी जमीन है."

कानूनी अड़चनें
लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई शख्स विदेशी धरती पर साम्राज्य बना सकता है. जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर एडवर्ड स्वेन का कहना है, "बुनियादी स्तर पर वह ठीक कह रहे हैं कि इस जमीन पर किसी का मालिकाना हक नहीं है लेकिन मैं यह नहीं समझ सकता हूं कि इसकी वजह से वह इस पर हक जता सकते हैं."

प्रोफेसर का कहना है, "और उन्हें सिर्फ एक झंडा गाड़ने के अलावा इस टापू पर हक जताने के लिए दूसरे काम भी करने होंगे. सिर्फ सेल्फी लेने से कोई टापू किसी का नहीं हो जाता."

हीटन का कहना है कि उनका अगला कदम यही है. वह वॉशिंगटन में एक ऑफिस बना रहे हैं और वहां अभी से फोन नंबर ले लिया गया है. लेकिन वह भी मानते हैं कि इसे मनवाना आसान काम नहीं होगा, "मुझे लगता है कि एक बार जब मिस्र और सूडान को समझ आएगा कि हम वहां बड़ी ताकत बनने जा रहे हैं, तो मुझे लगता है कि वे लोग नॉर्थ सूडान के साम्राज्य को मान्यता दे देंगे."

मिस्र और सूडान के दूतावासों ने इस मुद्दे पर सवाल किए जाने पर जवाब देने की जरूरत नहीं समझी.

एजेए/ओएसजे (एएफपी)

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