बुल्गारिया बना ईयू अध्यक्ष, चुनौतियां कम नहीं | दुनिया | DW | 11.01.2018
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दुनिया

बुल्गारिया बना ईयू अध्यक्ष, चुनौतियां कम नहीं

बुल्गारिया 1 जनवरी 2018 से अगले छह महीने के लिए यूरोपीय संघ का अध्यक्ष है. भ्रष्टाचार से ग्रस्त यह देश पिछले दिनों ईयू की निगरानी में रहा है. इस चुनौतीपूर्ण माहौल में वह अध्यक्षता का निर्वाह कैसे कर सकेगा?

यूरोप के गरीब और बेहद ही भ्रष्ट देशों में गिना जाने वाला बुल्गारिया, जनवरी से लेकर जून 2018 तक यूरोपीय संघ का अध्यक्ष पद संभालेगा. 11 जनवरी को एक औपचारिक कार्यक्रम में यह जिम्मेदारी बुल्गारिया को सौंपी गई. इन छह महीनों में बुल्गारिया ईयू में अपनी छवि सुधार सकता है. साथ ही संघ के साथ किन मुद्दों पर गठबंधन किया जाए और किन पर सौदेबाजी इसे भी सीखने का बुल्गारिया के पास एक बड़ा मौका होगा.

बुल्गारिया-यूरोपीय संघ के रिश्ते

74 लाख की आबादी वाला बुल्गारिया 2007 में यूरोपीय संघ में शामिल हुआ. शामिल होने के एक दशक बाद भी भ्रष्टाचार से निपटने के उसके तरीकों पर यूरोपीय संघ सवाल उठाता रहा है. समाज के हर हिस्से में भ्रष्टाचार होने के साथ ही राजनीतिक भ्रष्टाचार इस देश की सबसे बड़ी समस्या है. यूरोपीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप बुल्गारिया ढलता है या नहीं, इस पर यूरोपीय संघ की निगरानी बनी रहती है. लेकिन ईयू के साथ ने बुल्गारिया को बुनियादी और आर्थिक रूप से बेहतर किया है.

इसके साथ ही गरीबी, अपराध और अन्य सामाजिक समस्याओं में कमी आई है. अब देश से बाहर काम करने वाले नागरिक बड़ी मात्रा में पैसा भेजते हैं. वहीं ईयू से मिलने वाली फंडिंग के चलते देश का बुनियादी ढांचा सुधरा है लेकिन समस्याएं अब भी बनी हुईं हैं. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशलन के परसेप्शन इंडेक्स के मुताबिक, ईयू के भ्रष्टतम देशों में बुल्गारिया का नाम टॉप पर आता है.

बुल्गारिया के सामने चुनौती

अपनी छवि को सुधारने के लिए यह छह महीने बुल्गारिया के लिए एक मौका हैं. लेकिन इस दौरान उसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं. ईयू के अध्यक्ष के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती होगी यूरोपीय एकता को बनाए रखना. वो भी ऐसे वक्त में जब पोलैंड में आर्टिकल 7 लागू कर दिया गया है और ब्रेक्जिट जैसे मसले पर नियम-कायदे अब तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं. दूसरी समस्या है यूरोप के देशों में दक्षिणपंथ का उभार. हाल में ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य में पॉपुलिस्टों को जीत मिली है. जर्मनी में भी धुर दक्षिणपंथी एएफडी पार्टी संसद जाने में सफल रही है. इन सब के बीच रूस को लेकर यूरोपीय देशों की बढ़ती आंशकाएं भी बुल्गारिया के समक्ष एक चुनौती होगी.

तीसरी चुनौती है सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष. आतंकी गुट आईएस का कमजोर पड़ना बेशक दुनिया के लिए अच्छी खबर है लेकिन आईएस से लौट रहे लोगों को अपनाना बड़ी चुनौती है. यूरोपीय संघ के सदस्यों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए एक "पर्मानेंट स्ट्रक्चर्ड कोऑपरेशन" (PESCO) की पहल की है. इस साल कई प्रोजेक्ट लॉन्च होने हैं. बुल्गारिया पर इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी रहेगी.

यूरोप में इन दिनों शरणार्थियों का मसला छाया हुआ है और इसने ईयू सदस्यों को बांट दिया है. पूर्वी और पश्चिमी यूरोप के देशों के बीच पैदा हुए मतभेदों को पाटना नए अध्यक्ष की चुनौती होगी. जहां जर्मनी, संघ के अन्य देशों के साथ इस मुद्दे पर सहयोग चाहता है तो वहीं पोलैंड और हंगरी ने मध्यपूर्व से आए शरणार्थियों को लेने से साफ मना कर दिया है.

बुल्गारिया के पास अवसर

बुल्गारिया पश्चिमी बाल्कन के अल्बेनिया और सर्बिया जैसे देशों को यूरोपीय एजेंडे में लाने के लिए स्वयं को बेहद ही मजबूत मध्यस्थ की भूमिका में पेश करना चाहता है. इसके लिए इस साल 17 मई को इस विषय पर चर्चा करने के लिए यूरोपीय संघ का सम्मेलन भी होना है. 

इन चुनौतियों का रणनीतिक समाधान निकालने में बुल्गारिया किस हद तक सफल होता है, यह तो अगले छह महीने बाद नजर आएगा. लेकिन इस दौरान बुल्गारिया, यूरोपीय संघ के अन्य देशों के साथ करीब से काम कर सकेगा. यह निकटता बुल्गारिया के तमाम नेताओं और राजनीतिक दलों को यूरोपीय संघ के काम के तरीके को समझने का एक मौका होगा. इसके साथ ही बुल्गारियाई राजनीति को यूरोप और दुनिया के अन्य देश भी करीब से जान सकेंगे. द गार्डियन ने एक सूत्र के हवाले से लिखा है कि एक वक्त था जब छोटे देशों में यूरोपीय संघ को लेकर डर था. लेकिन अगर अब ये देश वित्तीय स्थिरता और बड़े निर्णयों में योगदान देंगे तो समस्याएं कम हो सकेंगी.  

भारत और बुल्गारिया

बुल्गारिया की अध्यक्षता में यूरोप और भारत के संबंधों को भी नई गति मिल सकती है. दोनों देशों के बीच बुल्गारिया के यूरोपीय संघ में शामिल होने से पहले भी अच्छे संबंध रहे हैं. पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और मजबूत हुए हैं. भारत की कई कंपनियां बुल्गारियाई कंपनियों में छोटी अवधि के निवेश की योजना बना रहीं है. भारत और बुल्गारिया के बीच साल 2006 से साल 2016 के दौरान कारोबार 7.9 करोड़ डॉलर से बढ़कर 21.5 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया.

भारतीय कारोबारियों ने बुलगारिया के वाइन, दवा, टैक्सटाइल्स, खाद्य प्रसंस्करण, स्टील, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में रुचि दिखाई है. वहीं बुल्गारियाई कारोबारियों की नजर भारत के सूचना प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग सेक्टर में मौजूद निवेश अवसरों पर है. भारत मुख्य रूप से बुल्गारिया को ऑर्गेनिक रसायन, तंबाकू (कच्चे माल के तौर पर), इलेक्ट्रिक पार्ट्स, ऊन आदि का निर्यात करता है. वहीं बुल्गारिया, भारत को क्रॉफ्ट पेपर, रेडियो ब्रॉडकास्टिंग में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, एल्युमीनियम स्क्रैप, प्लास्टिक, कॉपर स्क्रैप, इंजन और मोटर्स का निर्यात करता है.

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