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दुनिया

बुलंद इरादों को रोबोट सूट का सहारा

साहसिक कारनामे करने वाले एक विकलांग जापानी का कहना है कि वह अपनी व्हीलचेयर को छोड़ एक अत्याधुनिक रोबोटिक सूट पहनकर फ्रांस के एक मध्ययुगीन हेरिटेज ठिकाने तक पैदल जाना चाहता है.

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48 वर्षीय सेजी उचीदा 27 साल पहले हुई एक कार दुर्घटना में चलने की क्षमता खो बैठे थे. उनका कहना है कि वह लंबे समय से फ्रांस के नॉरमंडी में पथरीले टापू पर स्थित मों साँ मिशेल के सुरम्य मठ पर जाने का सपना देख रहे हैं. अब वह अगली गर्मियों में रोबोट सूट की मदद से यह सपना पूरा करना चाहते हैं, जिसका नाम हाइब्रिड एसिस्टिव लिंब (एचएएल) है और जो बाहरी कंकाल की तरह काम करता है और पहनने वाले के पैरों की मांशपेशियों की क्षमता को बढ़ा देता है.

बैटरी से चलने वाले एचएएल का विकास वयोवृद्ध लोगों को आवागमन में मदद देने और अस्पताल में नर्सों को मरीजों को उठाने में मदद देने के लिए बनाया गया है. सूकूबा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योशीयूकी सांकाई द्वारा विकसित एचएएल का संपूर्ण शारीरिक मॉडल हाथ और पांव दोनों की सहायता करता है और उपयोग करने वाले के शरीर के संचालन में मदद करता है.

उचीदा और उनकी टीम ने सूट के एक पुराने संस्करण की सहायता से 2006 में स्विट्जरलैंड में 4,161 मीटर ऊंचे ब्राइटहॉर्न शिखर पर चढ़ने की विफल कोशिश की थी. उचीदा का कहना है कि वे मों साँ मिशेल के रॉक द्वीप पर स्थित मठ तक जाना चाहते हैं ताकि "यह साबित किया जा सके कि विकलांग लोगों के लिए एलेवेटर जैसी सुविधाओं का सहारा लिए बिना विश्व के ऐतिहासिक स्थलों तक जाना संभव है."

रिपोर्ट: एएफपी/महेश झा

संपादन: ए कुमार

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