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मनोरंजन

बुरके में फाइटर हीरोइन

वह पूरी तरह बुरके से ढंकी हुई है. सिर्फ आंखें और उसकी अंगुलियां देखी जा सकती हैं. जिया पाकिस्तान की नई सुपर हीरोइन हैं. अपने दुश्मनों से लड़ते समय भी वह बुरके में ही रहती है.

जिया पाकिस्तान की पहली एनिमेशन सीरीज की हीरोइन है. इस सीरीज में मुख्य किरदार एक महिला का है जो बुरके में अपने दुश्मनों से हाथ दो चार करती है. इसे बनाने वाले हारून रशीद देश में लड़कियों के लिए आदर्श किरदार डिजाइन करना चाहते हैं.

अपनी लड़ाई के दौरान जिया किसी हथियार का नहीं बल्कि किताबों और पेंसिलों का इस्तेमाल करती है. डॉयचे वेले के साथ इंटरव्यू में हारून रशीद बताते हैं, "ये प्रतीक के तौर पर हैं कि पेन या कलम हमेशा तलवार से ताकतवर होती है. हम दर्शकों को दिखाना चाहते हैं कि पढ़ाई से कई समस्याएं हल हो सकती हैं."

यह टीवी सीरियल 13 एपिसोड वाला है और 22 मिनट दिखाया जाता है. इसमें सुपर हीरोइन की कहानियां हैं जो रोजमर्रा में एक शिक्षक हैं. वह और उनके तीन छात्र काल्पनिक शहर हवालपुर से आते हैं.

बुरका दमन का प्रतीक नहीं

सीरियल की हीरोइन को बुरका पहनाना पाकिस्तान में पूरी तरह पसंद किया जा रहा हो, ऐसा नहीं है. बुरका पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रुढ़िवादी इस्लाम का प्रतीक है. कुछ लोग इसे महिलाओं के दमन का प्रतीक मानते हैं. जर्मनी के शहर एरलांगन में मीडिया रिस्पॉन्सिबिलिटी इंस्टीट्यूट की सबीने शिफर कहती हैं, "पश्चिम में बुरका एक मजबूत प्रतीक है. इसलिए पहली नजर में वह चौंकाता है. लेकिन ये सुपर हीरोइन उस पुरातनपंथी विचार के बारे में नहीं बोलती. वह बहुत मजबूती से अन्याय के खिलाफ लड़ती है."

Pakistan Zeichentrickserie Burka Avenger

बुरका एवेंजर सीरिज

इस सीरीज का बुरका निन्जा के ड्रेस जैसा लगता है. रशीद के मुताबिक,"वह दूसरे सुपर हीरो हीरोइनों की तरह अपनी पहचान साथ लाती है." रशीद दलील देते हैं कि इस पहनावे का चुनाव करके वह सीरीज को स्थानीय रंग देना चाहते थे. उन्होंने बहुत सोच समझ कर कैट वुमन या वंडर वुमन जैसे कैरेक्टर से अलग रंग और पहचान अपने किरदार को दी है. पश्चिम से आने वाली अधिकतर सुपर हीरोइनें बहुत कम कपड़े पहनी होती हैं. इससे महिला के वस्तु बन जाने का खतरा रहता है.

हर बार नई कहानी

एक बार जिया पर्यावरण संरक्षण के लिए खड़ी होती है तो दूसरी कहानी में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए. वैसे तो इस सीरीज में पाकिस्तान के सामाजिक ताने बाने की विषमताओं को दिखाया गया है लेकिन साथ ही वह बच्चों को पसंद आने वाले फॉर्मेट में रखी गई हैं. इसमें हिंसक फाइट्स नहीं हैं बल्कि हल्के फुल्के संवाद हैं.

पहली कड़ी में किसी गांव के स्कूल बंद करने के आदेश दिए गए लेकिन बुरका एवेंजर ने इस फैसले को किसी तरह पलट दिया. यह एक ऐसी लड़ाई है जो पाकिस्तान के लोग अच्छे से जानते हैं. तालिबानियों ने हाल के दिनों में कबायली इलाकों में कई स्कूल बंद करवाए हैं खासकर लड़कियों के क्योंकि वह लड़कियों की शिक्षा के खिलाफ हैं. यह कड़ी मलाला यूसुफजई की भी याद दिलाता है जिसे अक्टूबर 2012 में चरमपंथियों ने गोली मारी थी क्योंकि उसने पाकिस्तान में लड़कियों का स्कूल बंद करने का खुला विरोध किया था.

Pakistan Zeichentrickserie Burka Avenger

एनिमेशन सीरिज का पोस्टर

अंतरराष्ट्रीय नहीं

रशीद ने यह सीरीज पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए बनाई है और फिलहाल यह उर्दू में चल रही है. इसे पश्तो में भी बनाया जाएगा ताकि यह पश्चिमोत्तर के इलाकों में दिखाई जा सके. इस सीरीज के साथ ही रशीद ने एक स्मार्ट फोन ऐप भी बनाया है. क्योंकि इसी से सब शुरू हुआ है. रशीद ने बताया कि तीन साल पहले उन्होंने आईटी विशेषज्ञों के साथ मिल कर बुरका फाइटर्स का एक इंटरएक्टिव ऐप बनाया था. इसके विज्ञापन के लिए उन्होंने एक एनिमेशन सीरीज बनाई. उन्हें ये इतनी पसंद आई कि उन्होंने टीवी के लिए इसकी और कड़ियां बनाने का फैसला किया. इसके लिए पैसे उन्होंने खुद ही इकट्ठा किए और इसके लिए म्यूजिक भी खुद ही बनाया. 13 कड़ियों में कुछ गाने हैं जो उन्होंने और पाकिस्तान के कुछ रॉक स्टार ने लिखे और गाए हैं.

धीमा बदलाव

रशीद कहते हैं कि इस सीरीज का मुख्य उद्देश्य लोगों को हंसाना है, उनका मनोरंजन करना है. साथ ही किशोरों तक यह संदेश पहुंचाना कि लोगों में कोई फर्क नहीं और शिक्षा से उनकी जिंदगी बेहतर होती है.

मीडिया विशेषज्ञ सबीने शिफर को लगता है कि पाकिस्तान में कुछ बदलाव होना चाहिए ताकि सीरियल में दिखाई गई बातें सच हो सकें. "अच्छी शिक्षा से सब मिल सकता है, पाकिस्तान में यह पूरी तरह सच नहीं." सामाजिक ऊंच नीच के सिस्टम से तेजी से बाहर निकल पाना अक्सर मुश्किल ही होता है.

रिपोर्टः राहेल बेग/आभा मोंढे

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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