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दुनिया

बुद्ध की जन्मतिथि का राज

नेपाल के लुम्बिनी में ऐसे सबूत मिल रहे हैं, जो महात्मा बुद्ध की जन्मतिथि पर चौंकाने वाले तथ्य सामने ला सकते हैं. लुम्बिनी में ही बुद्ध का जन्म हुआ था.

शांत माहौल में पुरातत्वविदों का काम चल रहा है और पास में ही बौद्ध भिक्षुओं की प्रार्थना. रिसर्चरों का दावा है कि बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में ईसा से छह शताब्दी पहले हुआ. यानी मौजूदा मान्यता से करीब 200 साल पहले.

नेपाल के वरिष्ठ पुरातत्वविद कोष प्रसाद आचार्य ने 1990 से पहले लुम्बिनी में खनन का काम किया. उस वक्त नेपाल में राजशाही थी और माओवादी मुहिम की शुरुआत भी नहीं हुई थी. प्रोजेक्ट तो 1996 में पूरा हो गया लेकिन आचार्य को इसके नतीजों से संतुष्टि नहीं थी.

आचार्य का कहना है, "मेरे विचार से वहां कुछ बड़ा सांस्कृतिक खजाना था, जिसे हम हासिल नहीं कर पाए." आचार्य प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद राजधानी काठमांडू लौट आए और रिटायर होने तक अपना सरकारी काम करते रहे.

कैसे मिली लुम्बिनी

बुद्ध की जन्मस्थली बीच में खो सी गई थी, जब वहां जंगल और विशाल वृक्ष उग आए थे. इसे 1896 में दोबारा खोजा गया. वहां मौजूद ईसा पूर्व तीसरी सदी के एक खंभे ने इतिहासकारों का काम आसान किया. इसके बाद से यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित कर दिया है. हर साल लाखों बौद्ध अनुयायी यहां आते हैं. आने वाले दशकों में उनकी संख्या और बढ़ सकती है.

अब 62 साल के हो चुके आचार्य नेपाल के पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक पद से रिटायर हो चुके हैं. यूनेस्को ने उनसे कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रोजेक्ट का संयुक्त रूप से निदेशन करें. यह प्रोजेक्ट लुम्बिनी की बुनियाद पर आधारित है. यूनेस्को ने आचार्य और उनके पुराने साथी ब्रिटेन के पुरातत्वविद रॉबिन कनिंघम से कहा है कि वे एक टीम की अगुवाई करें.

महान पल

कनिंघम ने बताया, "हमारे लिए महान पल 2011 में उस वक्त आया, जब हमें वहां अशोक मंदिरों के नीचे एक किस्म के गड्ढे के पास ईंटों से बना मंदिर मिला. तब हमें समझ आ गया कि यहां अभी बहुत कुछ करना बाकी है." इसके बाद दो साल तक पुरातत्वविदों, भूगर्भशास्त्रियों और नेपाल तथा ब्रिटेन के लोगों की मदद से वहां खुदाई की गई. इस दौरान ध्यान कर रहे भिक्षु और भिक्षुणियां भी मौजूद रहीं.

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