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विज्ञान

बीमार होते हैं उम्रदराज पिता के बच्चे

ज्यादा उम्र में पिता बनने के कई ऐसे खतरों का पता चल रहा है, जिनके बारे में पहले नहीं सोचा गया. अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च में सामने आया है कि ज्यादा उम्र वाले पिता के बच्चे को मनोरोग की समस्या हो सकती हैं.

रिसर्चरों का मानना है कि ऐसे बच्चों में एकाग्रता की कमी, ऑटिज्म और बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या भी हो सकती है. अमेरिका और स्वीडन के रिसर्चरों ने यह शोध 1973 से 2001 के बीच स्वीडन में पैदा हुए 26 लाख लोगों से संबंधित आकड़ों के आधार पर किया. 24 साल की उम्र के बाद बाप बनने वाले पुरुषों में ऐसे मामले ज्यादा पाए गए जहां बच्चों को किसी तरह की मनोवैज्ञानिक परेशानी है. सबसे ज्यादा खतरा 45 और उससे ज्यादा उम्र में पिता बनने पर पाया गया.

ये नतीजे उस तर्क का भी विरोध करते हैं जिसके अनुसार वीर्य का उम्र से कोई लेना देना नहीं. हालांकि यह रिसर्च उस धारणा के खिलाफ प्रमाण नहीं प्रस्तुत करती है. न ही यह इस बात की तरफ इशारा करती है कि ज्यादा बड़ी उम्र में बाप बनने पर बच्चे को मनोरोग होगा ही.

किस तरह का खतरा

ज्यादा उम्र में पिता बनने पर एक फीसदी बच्चों पर ऑटिज्म, एकाग्रता की कमी, हाइपर एक्टिविटी और बाइपोलर डिसऑर्डर का खतरा रहता है. जबकि करीब 4 फीसदी बच्चे स्किजोफ्रेनिया के शिकार या आत्महत्या करने का प्रयास कर सकते हैं. उन्हें पढ़ने लिखने में भी दिक्कत हो सकती है.

रिपोर्ट के प्रमुख लेखक इंडियाना यूनिवर्सिटी के असोसिएट प्रोफेसर ब्रायन डिओनोफ्रियो ने बताया कि 20 से 24 साल के पिता और 45 और उससे अधिक उम्र के पिता के बच्चों में खतरे का अंतर चौंकाने वाला था. दोनों तरह के बच्चों के बीच तुलना कर पाया गया कि कम आयु वर्ग वाले पुरुषों के बच्चों के मुकाबले ज्यादा आयु वर्ग के पुरुषों के बच्चे को बाइपोलर डिसऑर्डर का रिस्क 25 गुना ज्यादा होता है. उन्हें एडीएचडी का 13 गुना ज्यादा खतरा होता है. ऐसे बच्चों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति होने की आशंका तीन गुना ज्यादा है और स्किजोफ्रीनिया की दो फीसदी ज्यादा.

डिओनोफ्रियो के मुताबिक रिसर्चरों ने उन तमाम बातों का ख्याल रखा जिनका परिणामों पर असर पड़ सकता था. इसमें उन्होंने इस बात का भी पता लगाया कि इन मामलों में मां की उम्र क्या है. परिवार में शिक्षा का क्या स्तर है और परिवार में किसी और को भी मनोरोग जैसी समस्या है क्या. इन सब बातों पर गौर करने के बाद ही वे इस नतीजे पर पहुंचे कि ज्यादा खतरे में बड़ी उम्र के पिता की संतानें होती हैं.

उन्होंने कहा, "लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि बाप बनने की सुरक्षित उम्र क्या है, लेकिन इसका कोई सीधा सा जवाब है नहीं." इसकी कोई समय सीमा नहीं है, "एक तरफ तो किसी भी उम्र में बाप बनना सही है, दूसरी तरफ इससे दिकक्त हो सकती है."

क्या है कारण

डिओनोफ्रियो उन वैज्ञानिकों में से हैं जो मानते हैं कि पुरुष के जीवन काल में शुक्राणु लगातार बनता रहता है, जितनी बार सेल नए शुक्राणु को बनाने के लिए विभाजित होता है उतनी बार उसमें परिवर्तन या म्यूटेशन हो सकता है. वह मानते हैं यह परिवर्तन इस तरह के खतरे का कारण हो सकता है.

बुधवार को यह रिपोर्ट साइकियाट्री पत्रिका में छपी. अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी में मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स के वैज्ञानिक सिमोन ग्रेगरी ने इस नए रिसर्च को प्रभावशाली बताया. रिपोर्ट को तैयार कर रहे रिसर्चरों के पास स्वीडन में बीस सालों में पैदा हुए लोगों के सारे आंकड़े उपलब्ध थे. इसके अलावा उनके पास मनोरोग के इलाज, शिक्षा के क्षेत्र और समाज कल्याण के मामलों के आकड़े भी मुहैया थे.

हालांकि ग्रेगरी ने कहा, "इसका मतलब यह नहीं कि ज्यादा उम्र के पुरुषों को बच्चे नहीं पैदा करने चाहिए."

एसएफ/एम (एपी)

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