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दुनिया

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में बड़े बदलाव

दुनिया की छोटी बड़ी घटनाओं को कई दशकों से करोड़ो लोगों तक पहुंचा रही बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भारी बदलाव होंगे. बीसीसी ने बजट कटौती के मद्देनजर पांच भाषाओं में कार्यक्रम बंद करने का फैसला लिया. सैकड़ों नौकरियो पर खतरा.

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अल्बानियाई, सर्बियाई, मैसिडोनियाई भाषाओं में कार्यक्रमों को बंद करने का फैसला लिया गया है. इसके अलावा अफ्रीका के लिए पुर्तगाली भाषा में और कैरिबियाई देशों के लिए अंग्रेजी भाषाओं में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम भी अब बीते समय की बात होने जा रहे हैं.

सात भाषाओं में रेडियो कार्यक्रम योजनाबद्ध तरीके से काम होंगे जिनमें अजेरी, चीनी, रूसी, स्पेनी (क्यूबा), तुर्क, वियतनामी और यूक्रेनी भाषा शामिल हैं. हिंदी, इंडोनेशियाई, किर्गिज, नेपाली, स्वाहिली, ग्रेट लेक्स सर्विस (रवांडा और बुरूंडी) का रेडियो पर शॉर्ट वेव कार्यक्रम मार्च 2011 से बंद हो जाएगा.

बीबीसी पर बजट कटौती का भारी दबाव है और इसी वजह से कड़े फैसले लिए जा रहे हैं. कई भाषाओं में कार्यक्रम बंद होने के अलावा अन्य कटौतियों की वजह से सैकड़ों नौकरियों पर तलवार लटक रही है.

अगले छह महीनों में बीबीसी के बजट में 16 फीसदी कटौती होनी है. इसी को ध्यान में रखते हुए बीबीसी के मुताबिक बचत करने की कोशिशें हो रही हैं. अक्तूबर में कंजरवेटिव सरकार के ब्रिटेन में आने के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र में कटौतियों की घोषणा हुई हैं.

बीबीसी वेबसाइट के अनुसार वर्ल्ड सर्विस में होने वाले कटौतियों की वजह से करीब 650 नौकरियां जाएंगी. फिलहाल वर्ल्ड सर्विस में 2400 लोग काम करते हैं. यह सारी कवायद 7 करोड़ 30 लाख डॉलर बचाने के लिए की जा रही है.

इसके अलावा अन्य सात भाषाओं में भी कटौतियों की संभावना है लेकिन उस बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है. बीबीसी कर्मचारियों को संस्था में बदलाव की पूरी जानकारी बुधवार को दी जाएगी.

कर्मचारी संगठनों ने बड़े पैमाने पर होने वाली कटौतियों पर जबरदस्त नाराजगी जताई है. बीबीसी कर्मचारियों में असंतोष का माहौल है क्योंकि एक ही दिन पहले ऑनलाइन बजट में 25 फीसदी की कटौती करने का फैसला लिया गया है.

बीबीसी ग्लोबल न्यूज के निदेशक पीटर हैरोक्स ने कहा, "जितनी बड़ी बजट कटौतियों की हम बात कर रहे हैं उनके मद्देनजर ये फैसले लिए जाने जरूरी हैं. हमें उन भाषाओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा जहां वाकई जरूरत है और जहां हमारा असर हो सकता हैं."

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट ने लंदन में वर्ल्ड सर्विस के मुख्यालय बुश हाउस के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस खबरों का प्रसारण अंग्रेजी और 31 अन्य भाषाओं में करती है. रेडियो, टेलिविजन और ऑनलाइन पर उसे पढ़ने, देखने, सुनने वालों की संख्या करीब 24 करोड़ है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: उज्ज्वल भट्टाचार्य

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