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जर्मन चुनाव

बीएचईएल, एनटीपीसी ने रिश्वत लेकर काम किया!

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, एनटीपीसी सहित अन्य पर रिश्वत लेकर काम करने का संदेह. रिश्वत कथित रूप से एक अमेरिकी कंपनी ने बड़े कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए दी.

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जिन कंपनियों का नाम इस मामले में सामने आ रहा है उनमें भारत हैवी इलैक्ट्रीकल्स लिमिटेड, महाराष्ट्र स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड, हरियाणा स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड, नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और भिलाई इलैक्ट्रिक शामिल हैं. यह बात तब सामने आई है जब एक जांच के सिलसिले में अमेरिका में न्याय विभाग की ओर से कोर्ट में कागजात पेश किए गए.

माना जा रहा है कि जिन लोगों को रिश्वत के जरिए सीधा फायदा पहुंचा है उनके नाम भी कोर्ट में पेश हुए कागजात में शामिल हैं. हालांकि अभी इस बारे में पुष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है. कैलिफोर्निया की कंट्रोल कम्पोनेन्ट कंपनी ने अमेरिकी अदालत में 31 जून 2009 को मान लिया कि उन्होंने 2003 से 2007 तक करीब 36 देशों में रिश्वत देकर काम करवाने की कोशिश की.

जिन देशों की कंपनियों को रिश्वत देने की कोशिश की गई उनमें भारत के अलावा चीन, संयुक्त अरब अमीरात और कतर सहित अन्य देश शामिल हैं. कंट्रोल कम्पोनेन्ट पर आरोप है कि वह रिश्वत देकर अपने मनमुताबिक कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की कोशिश कर रही थी जिसमें कई बार उसे सफलता मिली.

ऐसी रिपोर्टें हैं कि बीएचईएल के अधिकारियों को कई बार रिश्वत मिली लेकिन अधिकतर मामलों में रिश्वत की रकम पांच हजार डॉलर से कम ही रही. 2007 में भिलाई इलैक्ट्रिकल्स के अधिकारियों को आठ हजार डॉलर यानी करीब चार लाख रुपये की रिश्वत मिली तो हरियाणा इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड के अधिकारियों को 15 हजार डॉलर रिश्वत दी गई. लेकिन कोर्ट के कागजातों में अभी स्पष्ट नहीं है कि रिश्वत देने के बाद कितने कॉन्ट्रैक्ट कंट्रोल कम्पोनेन्ट को मिले.

कोर्ट में पेश हुए कागजातों के मुताबिक भारत में रिश्वत 2004 से 2007 के बीच दी गई. मंगलवार को अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया था कि रिश्वत देने के आरोपी फ्लावियो रिकोटी का प्रत्यर्पण हो गया है जो कंपनी के पूर्व अधिकारी थे. रिकोटी को फ्रैंकफर्ट में गिरफ्तार किया गया और प्रत्यर्पण के बाद उन्हें अमेरिका लाया गया है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: आभा एम

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