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दुनिया

"बिहार में फिर हुई जात-पात की राजनीति की जीत"

डीडब्ल्यू हिंदी के पाठकों ने बिहार चुनावी नतीजों पर अपनी कई प्रतिक्रियाएं भेजी हैं. हमने संकलित की हैं उनमें से कुछ चुनी हुई टिप्पणियां.

बिहार में जेडीयू और आरजेडी ने मिलकर 'जाति' के गणित का जटिल समीकरण सुलझा लिया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी कारण बिहार में महागठबंधन की जीत हुई है. केन्द्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता में आई बीजेपी का बीता डेढ़ साल का शासन देश में एक उदारवादी, बहुलतावादी राजनीति की दिशा से भटका दिखा. जानकार बिहार चुनावों में उनकी करारी हार का कारण इसे भी मानते हैं. डीडब्ल्यू हिंदी के पाठकों ने बिहार चुनावी नतीजों पर अपनी कई प्रतिक्रियाएं भेजी हैं. हमने संकलित की हैं उनमें से कुछ चुनी हुई टिप्पणियां.

अमन गुप्ता ने एक शेर लिख भेजा है. आरजेडी को संबोधित करते हुए कहते हैं कि "अपनी जीत पर इतना गुमान ना कर ऐ बेखबर, शहर में तेरी जीत से ज्यादा मेरी हार के चर्चे हैं."

वैसे चर्चे तो भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी होने ही थे. पाकिस्तानी अखबारों ने बिहार में बीजेपी की हार को पीएम मोदी की अतिवादी नीति की हार बताया है.

वहीं दीपक के. मित्रा ने "बिहार निर्वाचन में एक बार फिर जात-पात की राजनीति की जीत हुई" बताया है. इसी बिन्दु पर ध्यान दिलाते हुए लोकेश मिश्रा ने आरजेडी के लालू प्रसाद यादव और जेडीयू के नीतीश कुमार के साथ मिलकर चुनाव लड़ने और जीत जाने पर ताज्जुब किया है कि "दोनों लोग सीएम बन चुके थे, दोनों लोग धोखा दे चुके हैं जनता को, फिर दोनों ने हाथ मिला लिया, जनता फिर मूर्ख बन गई." धीरज कुमार वर्मा ने बीजेपी की परेशानी को सामने रखते हुए लिखा है, "बीजेपी दो नाव पर सवार थी और मांझी एक. इसमेँ गलत क्या है?"

मुहम्मद हबीब अंसारी का कहना है कि "घृणा की राजनीति बिहारी पसंद नहीं करते. बिहारी प्यार, मोहब्बत की भाषा समझते हैं, नफरत की नहीं. घृणा फैलाने वालों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है."

अशोक तुलसियान ने बिहारी अंदाज में नीतीश कुमार के लिए ये व्यंग्यात्मक संदेश लिखा है "नितीश बाबू - भाई कितनी भोली सी प्यारी प्यारी सूरत है इनकी और काम भी बहुत ही अच्छा किये हैं. तभी न लालू और कांग्रेस कितना अच्छा अच्छा बोलते थे इनके बारे में. ऊ तो गलत फहमी में आपस में लड़ते थे वैसे तो बहुत बढ़िया काम किये. जिधर का पाला मजबूत दिखा, उधर को ही भाग जाने को ही तो राजनीति बोलते हैं हमरे बिहार में."

राज्य में कांग्रेस ने 27 सीटें जीतते हुए पिछले 20 सालों में अपना दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नतीजे आने के बाद ये संदेश दिया.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने चुनावी नतीजों पर विजेताओं को बधाई देते इसे "क्षेत्रीय अस्मिता, विकास एवं सामाजिक न्याय की जीत" बताया. साथ ही ये भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि बिहार का विकास अब इतनी तेजी से होना चाहिए कि बिहारियों को महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों में न जाना पड़े. ठाकरे का दल महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय प्रवासियों और कामगरों के खिलाफ मुहिम चलाता रहा है और उन पर स्थानीय नौकरियां हड़पने का आरोप लगाता है.

रतन सलूजा ने महागठबंधन की जीत और बीजेपी की हार के लिए तीन कारण गिनाए हैं - "बीफ, आरक्षण और मीडिया." वहीं यशवंत लोधी इसे केवल आरजेडी के कंधों पर मिली जीत बताते हैं और कहते हैं कि "मोदी के वादे और नीतीश के काम का सवाल ही नहीं."

फेसबुक संदेश में आशीष दूबे ने लिखा कि "बिहार लौटा 90 के दशक में." इस दशक की यादों को ताजा करते हुए शिवेन्द्र कांत पुरी गोस्वामी ने लिखा "बिहार को जंगल राज_2 मुबारक हो. अब किसी भी बिहारी को खुद को पिछड़ा बेरोजगार गरीब कहकर केंद्र सरकार को कोसने का कोई हक नही होगा."

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