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दुनिया

बिहार में पहले दौर का मतदान कल

भारत में राजनीतिक सक्रियता के प्रमुख केन्द्र माने जाने वाले राज्य बिहार में चुनाव हो रहा है. विधानसभा चुनाव के लिए गुरूवार को पहले दौर का मतदान होगा. इस दौर में 47 सीटों पर वोट डाले जाएंगे.

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जेडीयू क्षत्रप नीतीश और शरद

आरोपों और छींटाकशी से भरे चुनाव अभियान के बाद बिहार विधानसभा चुनाव के पहले दौर में गुरुवार को 47 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. पश्चिम बंगाल से सटे उत्तर पूर्व बिहार के इन इलाकों में पिछड़ापन और बेरोजगारी तो है ही, बाढ़ से होने वाली तबाही और पलायन भी एक प्रमुख मुद्दा है. चुनाव अभियान के दौरान भी सत्ता के दोनों प्रमुख दावेदारों यानी जनता दल (यूनाइटेड)-भाजपा गठबंधन और राष्ट्रीय जनता दल-लोक जनशक्ति पार्टी (आरजेडी एलजेपी) ने विकास और बेरोजगारी को ही अपना प्रमुख मुद्दा बनाया.

LJP, Lok Janshakti Party Ramvilas Paswan

एलजेपी प्रमुख पासवान

प्रचार के आखिरी दौर में कांग्रेस ने केंद्रीय योजनाओं के लिए मिलने वाली रकम का सही इस्तेमाल नहीं होने का आरोप लगाते हुए नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया. अंतिम दौर में यही मुद्दा सब पर हावी रहा.

हर बार की तरह बिहार में इस बार भी चुनाव अभियान आपसी धींटाकशी से भरा रहा. इस दौरान तमाम राजनीतिक दल एक-दूसरे को भ्रष्ट और झूठा साबित करने में जुटे रहे. दिलचस्प बात यह है कि चुनाव में सीधा मुकाबला भले ही नीतीश कुमार और लालू यादव के बीच हो, लेकिन चुनावी बयानबाजी से ऐसा लग रहा है कि असली टक्कर कांग्रेस और जेडीयू के बीच ही है.

चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर विपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी तक एक-दूसरे पर निशाना साधते रहे. मनमोहन सिंह ने नीतीश सरकार पर केंद्रीय योजनाओं पर सही तरीके से अमल नहीं करने का आरोप लगाया. ऐसे में पार्टी के महासचिव राहुल गांधी भला कैसे पीछे रहते. उन्होंने बिहार में विकास के दावों को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि विकास नहीं होने की वजह से ही इलाके के युवक रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इस मामले में पीछे नहीं रहीं. उन्होंने भी नीतीश सरकार को भ्रष्टाचार के घेरे में खड़ा कर दिया. वैसे, सत्ता में वापसी का सपना देख रहे पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने तो बिहार में कांग्रेस के वजूद को ही नकार दिया.

Lalu Prasad

लालू की लालटेन

प्रधानमंत्री समेत दूसरे कांग्रेसी नेताओं के हमलों से तिलमिलाए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इसी तर्ज पर उनको जवाब दिया. उन्होंने कहा कि बिहार को हर साल एक हजार करोड़ रुपए देने की शुरूआत एनडीए सरकार ने वर्ष 2002 में की थी, यूपीए सरकार ने नहीं. चुनाव प्रचार के आखिरी दिन राज्य में कई रैलियों को संबोधित करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने तो प्रधानमंत्री को सार्वजनिक बहस की चुनौती दे दी.

चुनाव में हर बार की तरह इस बार भी बाहुबलियों और रिश्तेदारों की भरमार है. कहीं बाप-बेटे चुनाव मैदान में हैं तो कहीं देवर भाभी. कुछ बाहुबलियों ने तो अपनी पत्नियों को मैदान में उतार दिया है.

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इलाकों के अलावा मिथिलांचल की इन 47 सीटों के लिए कुल 636 उम्मीदवार मैदान में हैं. मुख्य राजनीतिक दलों के अलावा बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और वामपंथी दलों ने यहां मुकाबले को भले ही बहुकोणीय बना दिया हो, लेकिन इन दलों के उम्मीदवार वोट काटने की ही स्थिति में हैं. राज्य में चुनाव अभियान तो अब तक शांतिपूर्ण ही रहा है लेकिन बाहुबलियों की फौज और अतीत को देखते हुए सभी को पूरा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से निपटने की आस है.

रिपोर्टः प्रभाकर

संपादनः उभ

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