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दुनिया

बिना शादी बच्चा पैदा करने का अधिकार मांगती चीनी महिलाएं

चीन में सिंगल महिलाओं को न सिर्फ "छोड़ी हुई औरतें" कह कर ताना दिया जाता है, बल्कि उन्हें बच्चे पैदा करने का अधिकार भी नहीं है. चीन में कई नियम हैं जो सिंगल और कुंवारी महिलाओं को बच्चा पैदा करने से रोकते हैं.

चीन में पुरूषों के मुकाबले महिलाओं का घटता अनुपात और बूढ़ी होती आबादी की समस्या को देखते हुए इसी साल एक बच्चे की तीन दशक पुरानी नीति को खत्म किया गया था. पहले चीन में दो बच्चे पैदा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती थी लेकिन अब वहां हर शादीशुदा जोड़े से दो बच्चे पैदा करने को कहा जा रहा है.

लेकिन यह नियम सब लोगों के लिए नहीं है. खासतौर से उन महिलाओं के लिए राह अब भी बहुत मुश्किल है जो बिना शादी किए बच्चे पैदा करना चाहती हैं. 26 वर्षीय मा हु ने शादी नहीं की है, लेकिन वह बच्चा पैदा करना चाहती हैं. इसके लिए उन्होंने चार फर्टीलिटी क्लीनिकों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की. उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, "मुझे बहुत मायूसी हुई. ऐसा लगा कि मेरे अधिकारों का ध्यान नहीं रखा गया.”

चीन में समलैंगिकों और लैंगिक समानता के लिए काम कर रहे तीन गैर सरकारी संगठनों की तरफ से प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में मा ने कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि चीन की सरकार हर परिवार से दो बच्चे पैदा करने को कह रही है, लेकिन दूसरी तरफ सिंगल रह कर बच्चे पैदा करने वाले लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है.”

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इस रिपोर्ट में ऐसी बहुत सारी महिलाओं का जिक्र है. रेनबो लॉयर्स, जेंडरवॉच और जेंडर इक्वॉलिटी नेट नाम के तीन गैर सरकारी संगठनों ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसका शीर्षक है : "सिंगल महिला के प्रजनन के अधिकार- नीति और जीवंत अनुभवों पर एक शोध रिपोर्ट.” ये संगठन बच्चे के जन्म को शादी से जोड़ने की सरकार की नीति की आलोचना करते हैं.

चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार नियोजन आयोग के अनुसार सिर्फ वही महिला अपना फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करा सकती है जो शादी का प्रमाणपत्र दिखा सके. समलैंगिक अधिकारों के लिए काम करने वाले वकील डैनी डिंग कहते हैं, "मौजूदा नियमों के अनुसार सिंगल महिला ही नहीं, बल्कि उन महिलाओं को भी बच्चा पैदा करने का अधिकार नहीं है, जिनके बॉयफ्रेंड या पार्टनर हैं लेकिन वे शादी नहीं करना चाहतीं.”

वो कहते हैं, "चीन में समलैंगिक शादियों की अनुमति नहीं है. ऐसे में, जिन महिला समलैंगिकों की पार्टनर हैं, उन्हें भी सिंगल ही समझा जाता है और वो फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से बच्चा पैदा नहीं कर सकतीं.”

वैसे, चीन में बच्चा पैदा करने के अधिकार को लेकर बहस नई नहीं है. जब मशहूर चीनी अभिनेत्री और निर्देशक शु चिंगलेई ने माना कि वो अपने अंडाणु फ्रीज कराने के लिए अमेरिका गई थीं तो चीन में सोशल मीडिया पर यह बड़ा मुद्दा बना था कि क्या सिंगल महिला को बच्चे पैदा करने का अधिकार है.

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एक मशहूर ब्लॉगर हान हान ने चीनी सोशल मीडिया वेबसाइट सिनावाइबो पर पूछा, "क्या शादी के बिना बच्चे पैदा करना ठीक नहीं है?” इसके जवाब में उन्हें हजारों कमेंट मिले.

सिंगल महिलाओं को बच्चा पैदा करने का अधिकार न मिलने का संबंध चीनी समाज के पितृसत्तात्मक होने को माना जाता है. महिला अधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता गुओ चिंग ने डीडब्ल्यू को बताया, "हमारे समाज में पारंपरिक तौर पर एक महिला और एक पुरूष को ही एक जोड़ा माना जाता है. इसलिए किसी और तरह की शादी को मान्यता नहीं है.” भारत की तरह चीनी समाज में शादी से पहले यौन संबंधों को अच्छा नहीं माना जाता है. इसलिए शादी के बिना बच्चे को जन्म देने की बात तो और भी बुरी समझी जाती है.

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चीन में जो महिलाएं बिना शादी के मां बनती हैं, उनसे मोटी "सोशल मेंटीनेंस फीस" वसूली जाती है. कई बार यह रकम परिवार की सालाना प्रति व्यक्ति आय के तीन से छह गुना होती है. पिछले साल बिना शादी बच्चा पैदा करने वाले शेन पोलुन और वु शिया से 43,910 युआन यानी 4.3 लाख रुपये वसूले गए थे. इस जोड़े ने जुर्माने की रकम को चुकाने के लिए लोगों से चंदा मांगा. साथ ही उन्होंने परिवार नियोजन को लेकर एक बहस शुरू की.

इतना ही नहीं, सिंगल मांओं के बच्चों को हुकुओ नाम का दस्तावेज भी नहीं मिलता जो शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल के साथ साथ बैंक खाता खुलवाने और यहां तक कि शादी करने के लिए जरूरी है.

लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता गुओ चिंग कहते हैं कि चीन में ऐसी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है जो शादी को जरूरी नहीं मानतीं. कुछ तो इसे एक बोझ समझती है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि उन्हें बच्चे नहीं चाहिए. सामाजिक संगठन सरकार से मौजूदा नीति बदलने को कह रहे हैं. गुओ कहते हैं, "बच्चे को जन्म देने के लिए शादी जरूरी नहीं होनी चाहिए. शादी की आजादी और बच्चे पैदा करने की आजादी, दो अलग अलग अधिकार हैं.”

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