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मनोरंजन

बिकने को तैयार ब्लैकबेरी

तकनीक की दुनिया में कभी सिरमौर रहा ब्लैकबेरी अब बिकने जा रहा है. कंपनी ने शेयरों की एक बड़ी खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी देने का फैसला किया है. सौदा पूरा हुआ तो कंपनी पूरी तरह निजी हाथों में होगी.

क्या संयोग है कि एक तरफ एप्पल ने अपने नए फोन की रिकॉर्ड बिक्री का एलान किया है और दूसरी ओर ब्लैकबेरी कंपनी ही बिकने जा रही है. एंड्रॉयड और एप्पल के हाथों मार्केट गंवा चुकी ब्लैकबेरी लगातार अपने मॉडलों के लिए ग्राहकों में कम होती दिलचस्पी का सामना कर रही है. हालांकि एप्पल के नए फोन के लिए पिछली बारों की तरह उत्साह न दिखने की बात कही जा रही थी लेकिन कंपनी ने फिर भी बिक्री शुरू होने के पहले तीन दिन में रिकॉर्ड 90 लाख आईफोन बेचने का दावा किया है.

ब्लैकबेरी ने सोमवार को कहा कि उसने "फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड के नेतृत्व वाले एक गुट के उस प्रस्ताव को सहमति दे दी है जिसमें कंपनी को अपने नियंत्रण में लेने की बात है." फेयरफैक्स कनाडाई कंपनी है जिसके प्रमुख भारतीय मूल के अरबपति प्रेम वत्स हैं. फेयरफैक्स के पास पहले से ही ब्लैकबेरी के 10 फीसदी शेयर हैं. प्रेम वत्स ने ब्लैकबेरी के कंपनी के बोर्ड से इसी साल अगस्त में इस्तीफा दे दिया था.

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नहीं चला Z10

नए सौदे के बारे में वत्स ने कहा, "यह ब्लैकबेरी, उसके ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए एक नया निजी अध्याय खोलेगा." ब्लैकबेरी फेयरफैक्स के प्रस्तावित सौदे में साझेदार कंपनियां बाकी बचे हरेक शेयर के लिए 9 डॉलर की रकम देंगी. पूरा सौदा करीब 4.7 अरब डॉलर का होने की बात कही जा रही है. फेयरफैक्स इस लेनदेन में अपने शेयरों की हिस्सेदारी भी देगा. इस सौदे की खबर आते ही ब्लैकबेरी के शेयरों में उछाल आया है. विश्लेषक इसमें सकारात्मक संकेत देख रहे हैं. जे गोल्ड एसोसिएट्स के विश्लेषक जैक गोल्ड ने कहा, "ब्लैकबेरी के पास जो विकल्प फिलहाल हैं उनमें सबसे ज्यादा संभावना इसी में दिख रही है." उम्मीद की जा रही है कि यह सौदा 4 नवंबर तक पूरा हो जाएगा.

आज शहरी जीवन का जरूरी हिस्सा बनते जा रहे स्मार्टफोन को पहली बार ब्लैकबेरी ने ही कल्पना की दुनिया से निकाल कर लोगों के हाथ में रखा था, लेकिन उसके मुकाबिलों ने उसकी कमर तोड़ दी. साल की दूसरी तिमाही में ब्लैकबेरी की बाजार में कुल हिस्सेदारी घट कर महज 3.7 फीसदी रह गई है जो कंपनी के इतिहास में सबसे कम है. बाजार के 80 फीसदी हिस्से पर एंड्रॉयड का कब्जा है. एंडप्वाइंट टेक्नोलॉजी एसोसिएट्स के रोजर के का कहना है कि ब्लैकबेरी बढ़ते खतरों के बीच लापरवाह बनी रही. के ने कहा, "ब्लैकबेरी अपने कीबोर्ड पर ही अटकी रही उन्हें लगा कि ज्यादा लिखने वाले लोगों को कीबोर्ड की जरूरत होती है, जब तक वह टचस्क्रीन ले कर आई तब तक देर हो चुकी थी." रोजर के का मानना है कि इस उद्योग में अगर कोई कंपनी कुछ देर के लिए भी चूक जाए तो फिर वह फंस कर रह जाती है.

ब्लैकबेरी का नाम पहले रिसर्च इन मोशन हुआ करता था. इसी साल जनवरी में कंपनी ने अपने नया कॉर्पोरेट नाम और नए मॉडलों के साथ बाजार में वापसी की कोशिश की लेकिन नाकाम रही. एप्पल और सैमसंग को टक्कर देने के लिए उतारे गए ब्लैकबेरी के नए फोन जेड 10 टच स्क्रीन फोन की खराब बिक्री के कारण कंपनी को साल की दूसरी तिमाही में एक अरब डॉलर का नुकसान हुआ. बीते शुक्रवार कंपनी ने अपने 4,500 कर्मचारियों की छंटनी का एलान किया.

विश्लेषक मान रहे हैं कि कंपनी का निजी होना और संस्थापक माइक लाजारिडिस की संभावित वापसी ब्लैकबेरी में सुधार का मौका लाएगी. गोल्ड के मुताबिक कंपनी को दोबारा खड़ा करना आसान होगा. बोस्टन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एन वेंकट वेंकटरमन का मानना है कि ब्लैकबेरी आईबीएम, एचपी और डेल कंपनियों को लुभा कर निजी ग्राहकों की बजाय बिजनेस कम्युनिकेशन पर अपना ध्यान लगा सकती है.

एनआर/ओएसजे (एएफपी, एपी)

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