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दुनिया

बाल का कमालः करोड़ों का माल

नाइजीरिया की राजधानी अबूजा में बाजार के बीचों बीच कोई ऐसा शख्स और महिला जरूर मिल जाएगी, जो औरतों के बालों में नकली गुच्छे गूंथ रहा हो. बिलकुल एस्थर ओगबले की तरह.

उनके पास तीन ग्राहक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. एक हिजाब में भी है. इस काम में कई घंटे लगते हैं. फिर एस्थर 40 डॉलर प्रति दिन की कमाई कर लेती है. जिस देश में औसत आय दो डॉलर भी न हो, वहां के लिए इतनी रकम काफी है.

हाल के दिनों में बाल और हेयर स्टाइलिंग का कारोबार अफ्रीका में तेजी से बढ़ा है. अब यह अरबों का कारोबार बन चुका है. चीन और भारत जैसे देशों के बाद अब विश्व प्रसिद्ध कॉस्मेटिक कंपनियां लॉरियाल और यूनिलीवर अब अफ्रीका का रुख कर रही हैं. एस्थर जैसी कारोबारियों को अपनी उन महिलाओँ से उम्मीद है, जो अपने बालों को लेकर बहुत चौकस रहती हैं. 25 साल की ब्लेसिंग जेम्स कहती हैं, "मैं अपने बालों को अच्छे से रखना चाहती हूं ताकि मैं सुंदर दिखूं." ओगबले उनके बालों को एक खास तरह के जूड़े में बदल देती हैं.

करोड़ों का कारोबार

हालांकि अफ्रीका में बाल कारोबार के आंकड़े नहीं मिल सकते हैं लेकिन यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल का अनुमान है कि दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और कैमरन में 11 लाख डॉलर के शैंपू, हेयर लोशन और दूसरी कॉस्मेटिक्स बिक रही हैं.

लेकिन अबूजा के वूस बाजार में हाल के दिनों में धंधा मंदा पड़ा है. 37 साल की जोसफिन अगवा कहती हैं कि आतंकवादी हमले इसकी वजह हैं, "जो लोग यहां नहीं आना चाहते, वे हमें घरों पर बुलाते हैं." बीच बीच में वह असंभव सा दिखने वाला हेयर स्टाइल भी तैयार कर रही हैं, जिसमें छह घंटे लगते हैं. अप्रैल के बाद से अबूजा के बाजारों में तीन बार आतंकवादी हमले हो चुके हैं, जिनमें 20 लोग मारे गए हैं.

इस कारोबार में सिर्फ नाइजीरिया के ही लोग नहीं हैं. दक्षिण अफ्रीका की 20 वर्षीया छात्रा बुली ध्लोमो कहती हैं, "मैं एक ही तरह के हेयर स्टाइल से बोर हो जाती हूं." वह एक साल में अपने बालों पर 4000 रैंड (करीब 20,000 रुपये) खर्च कर सकती हैं.

लोरियाल की दक्षिण अफ्रीका निदेशक बेरट्रांड डे लालेऊ का कहना है कि अगर दक्षिण अफ्रीका की महिलाएं अपने बालों की डिजाइन बदलती रहती हैं, तो पश्चिमी अफ्रीका की महिलाएं उससे कहीं ज्यादा करती हैं, "अगर हेयर स्टाइल की बात होगी, तो मेरे ख्याल से अफ्रीका की महिलाएं सबसे साहसी होती हैं." कुछ दिनों पहले तक ड्राई हेयर स्टाइल के बारे में किसी को पता नहीं था. लेकिन अब सहारा मरुभूमि के आस पास यह काफी लोकप्रिय हो चुका है.

फ्रांसीसी कॉस्मेटिक्स कंपनी ने इस साल दक्षिण अफ्रीका में स्टाइलिंग स्कूल भी खोल दिया है, जहां हर जगह के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है और उन्हें हेयर ड्रेसिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है. 1994 से पहले दक्षिण अफ्रीका में नस्ली भेदभाव था और तब इस तरह के स्कूल की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.

भारत के बाल

दक्षिण अफ्रीका में इन दिनों 100 ब्रांड के बाल मिल जाते हैं. इसका बाजार 60 करोड़ डॉलर तक का पहुंच गया है. 2005 में यह इसका एक चौथाई भर था. ज्यादातर बिकने वाले बाल सिंथेटिक और सस्ते होते हैं, जो एशिया से आते हैं. असली बालों की कीमत बहुत ज्यादा होती है क्योंकि ये लंबे चलते हैं. भारत के गोदरेज ने 2008 में दक्षिण अफ्रीकी कंपनी किंकी को खरीद लिया. वह बालों का बड़ा सप्लायर है.

असली बाल भी भारत से आते हैं, जहां खास तौर पर हिन्दू मंदिरों में बालों को जमा किया जाता है. इन बालों को फिर चीन भेजा जाता है. वहां प्रोसेसिंग के बाद वे अफ्रीका आते हैं.

यह बात तो तय है कि अफ्रीका में असली बालों की मांग बढ़ रही है. वूज बाजार में बैठी जोसफिल एजेह का कहना है, "यह महंगा है लेकिन अगर आपको सुंदर दिखना है, तो यह जरूरी है. बाल बहुत जरूरी हैं."

एजेए/एएम (रॉयटर्स)

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