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दुनिया

बाल कहानियों से हटे नस्लवादी शब्द

सदियों पुरानी किताबों में ऐसी बातें होती हैं जो आज के हिसाब से सही नहीं कही जा सकती. एक जर्मन प्रकाशक बच्चों की एक किताब को फिर से रिलीज कर रहे हैं. नए संस्करण में नस्लवादी शब्द नहीं होंगे.

"नन्हीं चुड़ैल" उन बहुत सारी किताबों में शामिल है जो साहित्य विशेषज्ञ आंद्रेया वाइनमन अपने बेटे को पढ़कर सुनाती है. इस साल 90 साल के हो रहे ओटफ्रीड प्रॉयसलर की कहानी जर्मनी में सबसे लोकप्रिय बाल पुस्तकों में शामिल है. हालांकि यह पहली बार 1957 में छपी थी, लेकिन आज भी हर साल धड़ल्ले से बिक रही है. प्रकाशक थीनेमन के अनुसार हर साल उसकी 50,000 प्रतियां बिकती हैं.

क्लासिक किताबों का नया संस्करण

पिछले पचास सालों में "नन्हीं चुड़ैल" का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है. इस कहानी में नन्ही चुड़ैल का सबसे बड़ा सपना है अपने झाड़ू के साथ विशालकाय पहाड़ ब्लॉक्सबर्ग के चारों ओर घूमना. कहानी में कार्निवाल के दृश्य भी हैं, जिसमें वह रंग बिरंगी पोशाक पहने बच्चों से मिलती है. बच्चों ने अलग अलग देशों और संस्कृतियों के कपड़े पहन रखे हैं. जैसा कि 1950 के दशक में सामान्य हुआ करता था बच्चों को निग्रो या एस्कीमो लड़की बताया गया है.

जब आंद्रेया वाइनमन अपने बेटे को कहानी सुनाती हुई इस जगह पर पहुंचती, तो रुककर अपने बेटे को बताती कि इस तरह के शब्दों का अब इस्तेमाल नहीं होता क्योंकि वे लोगों को चोट पहुंचाने वाले और गलत हैं. अब श्टुटगार्ट की प्रकाशन कंपनी थीनेमन ने प्रोएसलर की किताब का नया संसकरण निकालने जा रही है जिसमें नस्लवादी शब्द नहीं होंगे. प्रकाशन कंपनी की प्रवक्ता स्वेया उनबेहाउन कहती हैं कि इन किताबों को युवा पाठकों के लिए उपलब्ध कराना और आकर्षक रखना थीनेमन प्रकाशन के लिए आर्थिक तौर पर बहुत जरूरी है. संशोधन पिछले सालों में पाठकों की टिप्पणियों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.

मिसाल की जरूरत

स्वया उनबेहाउन कहते हीं कि थीनेमन के प्रमुख क्लाउस विलबर्ग ने प्रॉयसलर परिवार से बार बार पूछा है कि क्या इन पंक्तियों में संशोधन किया जा सकता है. अब लेखक का परिवार इसके लिए तैयार हो गया है. वे कहती हैं, "हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि पृष्ठभूमि लेखक के इरादों के मुताबिक रहे." मिषाएल एंडे की किताब "द ड्रीम ईटर" का संशोधित संस्करण पहले ही रिलीज किया जा चुका है. इसके भी मूल संस्करण में निग्रो शब्द का उपयोग हुआ था.

थीनेमन जर्मनी के उन प्रकाशकों में शामिल है जो इस समय बच्चों की किताबों में नस्लवादी शब्दों के मसले को हल करने में लगे हैं. 2009 में प्रकाशन गृह फ्रीडरिष ओएटिंगर ने आस्ट्रिड लिंडग्रेन की किताब "पिप्पी लॉन्गस्टॉकिंग"में संशोधन कर निग्रो सम्राट की जगह दक्षिणी सागर के सम्राट कर दिया है. इसके विपरीत हांजर प्रकाशन ने मार्क ट्वेन की किताब "हकलबरी फिन" के नए अनुवाद में जानबूझकर निग्गर जैसे नस्लवादी शब्दों को रखने का फैसला किया है. अनुवादक आंद्रेयास नोल नहीं चाहते थे कि मार्क ट्वेन हकीकत से ज्यादा बुद्धिमान दिखें.

अतीत से सबक

प्रॉयसलर की किताबों की जानकार आंद्रेया वाइनमन कहती हैं कि थीनेमन को उनकी सलाह होगी कि "नन्हीं चुड़ैल" किताब में परिवर्तन नहीं किया जाए, हालांकि वे भी नस्लवादी शब्दों को समस्या मानती हैं. उनका कहना है कि अतीत के आलोचनात्मक विश्लेषण का मौका बने रहना जरूरी है. "मैं नहीं समझती कि प्रॉयसलर नस्लवादी थे. सवाल यह है कि आप क्लासिक किताबों से क्या उम्मीद करते हैं."

फ्रैंकफर्ट के गोएथे इंस्टीट्यूट में अपने सेमिनारों में वाइनमन के छात्र बच्चों की किताबों को फिर से पढ़ते हुए नए अर्थ से रूबरू होते हैं. "वे देखते हैं कि ये किताबें उनसे बहुत अलग हैं जो उनको याद हैं."

रिपोर्टः काथरीन श्लुसेन/एमजे

संपादकः निखिल रंजन

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