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विज्ञान

बाढ़ में अरबों यूरो

बाढ़, तूफान, बर्फीली ठंड और गर्मी. पर्यावरण परिवर्तन के ढेरों बुरे परिणाम हर साल सामने आ रहे हैं. रिसर्चरों के अनुसार 2050 तक ऐसी स्थिति होगी कि यूरोपीय संघ को बाढ़ से होने वाला नुकसान 23.5 अरब तक पहुंच जाएगा.

साल 2000 से 2012 के बीच बाढ़ के कारण यूरोपीय संघ को सालाना करीब 4.9 अरब यूरो का नुकसान उठाना पड़ा. लेकिन 2013 में स्थिति और बिगड़ गई और यह लागत बढ़ कर 12 अरब यूरो हो गया. 2050 तक इसमें कहीं ज्यादा बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. रिसर्चरों का कहना है कि 2050 तक लागत का दो तिहाई हिस्सा इसलिए बढ़ेगा क्योंकि बाढ़ के इलाकों में आने वाली संपत्ति को भारी नुकसान होगा. और एक तिहाई खर्च के पीछे कारण है, ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बारिश के पैटर्न में आने वाले बदलाव.

पास आता खतरा

2013 में जिस तीव्रता के तूफानों ने पृथ्वी को घेरा, इस तीव्रता के तूफान हर 16 साल में एक बार दोहराने की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट में आगे यह भी चेतावनी दी गई है कि 2050 के आते आते यह आवृत्ति 10 साल में एक बार हो जाएगी. रिसर्च में विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और प्राकृतिक आयामों पर गौर किया गया है. यूरोप में बाढ़ के बढ़ते खतरे को समझने के लिए हाइड्रोलॉजी, अर्थशास्त्र, गणित और पर्यावरण परिवर्तन के प्रति अनुकूलन के मुद्दों का आकलन किया गया.

इसके लिए एसआरईएस 1बी पर्यावरण मॉडल का इस्तेमाल किया गया. इसके अनुसार 21वीं सदी में पृथ्वी के तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है. बाढ़ के कारण संपत्ति को होने वाले नुकसान का एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक कारण भी है. मकानों की कीमत तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में लोग सस्ती संपत्ति की तलाश में शहरों से दूर और बाढ़ से आसानी से प्रभावित हो सकने वाले इलाकों की तरफ बढ़ रहे हैं.

कैसे निपटें

इस समस्या से निपटने के लिए कई बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी है. रिसर्चरों ने चेतावनी दी है कि यूरोपीय संघ को प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के लिए एक व्यवस्थित तरीके से इस पर काम करना होगा. ऑस्ट्रिया के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड सिस्टम्स एनैलिसिस के श्टेफान होखराइनर श्टिग्लर ने कहा, "अगर बाढ़ मध्य यूरोप में आती है तो इसके पूर्वी यूरोपीय इलाकों में बढ़ने का भी खतरा रहता है." आपदाओं से आर्थिक स्तर पर निपटने के ईयू के उपाय पैन यूरोपियन सॉलिडैरिटी फंड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ईयू को इस तरह की और तैयारी के दबाव के लिए तैयार रहना होगा.

2013 के दौरान आई बाढ़ों का जिम्मेदार अटलांटिक महासागर में वायुप्रवाह में आए विघ्न हैं. इनके कारण मध्य और पूर्वी यूरोपीय इलाकों में दबाव में कमी आई. इससे नौ देशों में भारी बारिश हुई. उन्होंने कहा, "सिर्फ बाढ़ की एक ही घटना से छोटे समय में ही बड़े इलाके को नुकसान पहुंचता है."

2014 की शुरुआत में ही ब्रिटेन के दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों पर बाढ़ का असर देखा जा चुका है. इसके अलावा फ्रांस के दक्षिणी और पश्चिमी इलाके और मध्य इटली भी बाढ़ से प्रभावित हो चुका है.

एसएफ/एएम (एएफपी)

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