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दुनिया

बाढ़, भूकंप और तेल रिसाव से घिरा रहा 2010

ज्वालामुखी की राख हो या तेल का बहाव. कुदरत ने बार बार इनसान को बताया कि उससे ज्यादा छेड़खानी भारी पड़ती है. साल 2010 में पर्यावरण से जुड़े कुछ मुद्दों पर डालते हैं नजर.

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ज्वालामुखी की राख

12 जनवरी 2010 का दिन हैती में शाम के पांच बजने को थे. लोग रोजमर्रा के काम निपटा रहे थे कि 35 सेंकड में 7.0 की तीव्रता वाले एक झटके ने पूरे देश की तस्वीर बदल दी. पहले से ही गरीबी और जिंदगी की मुश्किलों से जूझते कैरेबियाई देश हैती के कई शहर भूकंप के कारण भरभरा कर गिर गए. राजधानी पोर्ट ऑफ प्रिंस से 15 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में भूकंप का केंद्र था. इस भयावह भूकंप के तुरंत बाद 5.0 और 5.9 की तीव्रता वाले झटके महसूस किए गए. भूकंप से 2 लाख 30 हजार लोगों की मौत हो गई. मलबे के ढेर से कभी कभार सुनाई दे जाती धड़कनें जिंदगी का सबूत देती रहीं. जनवरी के बाद पूरा साल बीत गया है लेकिन भूकंप से बेघर हुए सभी लोग अभी तक घरों में नहीं लौट सकें हैं. अभी भी काम जारी है.

Flash-Galerie Erdbeben in Haiti

अप्रैल

15 अप्रैल के दिन आइसलैंड का आयाफ्यालायोकूल ज्वालामुखी फटने के कारण आयरलैंड सहित, ब्रिटेन और स्केंडेनेवियाई देशों की उड़ानों को रद्द कर दिया गया. इसके बाद वातावरण में करीब सात आठ दिन राख का कोहराम जारी रहा. यूरोप से दुनिया भर में जाने वाली फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं. एयरलाइन्स को भारी नुकसान हुआ. इसके बाद 9 मई और 17 मई को फिर से इस ज्वालामुखी ने राख उगली लेकिन तब तक एयरलाइन्स इस आपदा से निपटने के लिए लैस हो गई थीं.