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बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटे आतंकी गुट

लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए- मोहम्मद और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन कराची में कैंप लगाकर बाढ़ पीड़ितों के लिए चंदा जमा कर रहे हैं. इन सभी संगठनों को भारत में आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

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इन गुटों के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंध की वजह से वे दूसरे नामों से काम करने के लिए मजबूर हैं. वैसे 2005 में आए भूकंप के दौरान भी इन गुटों ने राहत और मदद के काम में हाथ बंटाया था. तब उनके पास सरकार से भी ज्यादा संसाधन थे.

इन गुटों का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तान के बाढ़ पीड़ितों के लिए करोड़ों रुपये जमा किए हैं और वे बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के काम में भी मदद कर रहे हैं. इस काम में जमात-उद-दावा संगठन भी मदद कर रहा है जिसे मुंबई पर 26 नवंबर 2008 के आतंकवादी हमले का कर्ताधर्ता समझा जाता है. साथ ही सिपाह-ए-साहाबा, हरकत-उल-मुजाहिदीन, हिजबुत तहरीर और लश्कर-ए-झांगवी भी बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं.

जमात उद दावा के हवाले से एक अख़बार ने लिखा है, "हमारे संगठन ने फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के नाम से खालिद बिन वालीद रोड, गुशलन-ए-इकबाल, गुलस्तां-ए-जौहर, लांधी, क्लिफटन, कोरंगी और कराची के दूसरे इलाकों में 29 राहत शिविर बनाए हैं." पहले जमात-उद-दावा ने अपने नाम से ही कैंप कायम किया, लेकिन जब पुलिस ने पैसे मांगने शुरू कर दिए तो उन्हें नाम बदलना पडा. कैंप में मौजूद हसन ने कहा, "पुलिस ने कहा कि हम आतंकवादी संगठन हैं. इसलिए कमाई में उन्हें हिस्सा देना होगा. जब हमने कहा कि यह तो जरूरतमंद लोगों के लिए पैसा जमा किया जा रहा है तो उन्होंने हमारा कैंप तोड़ना शुरू कर दिया. कहने लगे कि हमारा संगठन प्रतिबंधित है."

जमात-उद-दावा के कराची प्रमुख नावीद कमर का कहना है कि अमेरिका को खुश करने के लिए उनके संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है और उसका आतंकवाद से कुछ लेना देना नहीं है. कमर का दावा है, "हमने चारों प्रांतों में हर दिन 50 हजार बाढ़ पीड़ितों को पका हुआ खाना मुहैया कराया है और जल्द ही हम एक लाख बाढ़ पीड़ितों तक पहुंच जाएंगे."

जमात-उद-दावा का यह भी दावा है कि उसने आठ हजार परिवार को राशन पैकेट बांटे हैं. इनमें से हर पैकेट की कीमत 3,200 रुपये है जिसमें घी, चावल, दाल, साबुन और दूसरी चीजें हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः उभ